अन्ना समर्थकों को मिला थोडा सुकून

कानाफूसी है कि बाबा रामदेव के खुल कर कांग्रेस को हराने की अपील और भाजपा व एनडीए को साथ लेने के साथ ही अन्ना समर्थकों को काफी सुकून मिला है। अन्ना हजारे को ताजा आखिरी अनशन को जिन हालात में खत्म कर सक्रिय राजनीति में आने का ऐलान करना पड़ा, उसको लेकर जहां देशभर में उनकी छीछालेदर हुई, वहीं खुद अन्ना समर्थकों में मायूसी छायी थी कि वे राजनीति में आने के लिए थोड़े ही आंदोलन से जुड़े थे। वे अभी इसी उधेड़बुन में ही हैं कि क्या करें, क्या न करें? कुछ लोग राजनीतिक दल बनाने के साथ ही आंदोलन को जिंदा रखने की राय रखते हैं और टीम अन्ना के सदस्य भी इसी पर माथपच्ची कर रहे हैं। इसी बीच सभी अन्ना समर्थकों की नजर बाबा रामदेव के आंदोलन पर भी टिकी रही कि उसका क्या होता है? जैसे ही बाबा रामदेव ने गैर राजनीतिक आंदोलन को पूरी तरह से कांग्रेस के विरोध की दिशा में मोड़ दिया, अन्ना हजारे समर्थकों को बड़ी राहत मिल गई है। अब वे यह कहने की स्थिति में आ गए हैं कि बाबा जहां केवल कांग्रेस के विरोध में आ खड़े हुए हैं, वहीं वे सभी राजनीतिक पार्टियों में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण अब भी व्यवस्था परिवर्तन की बात कर रहे हैं। वे भले ही आंदोलन को राजनीति के आखिरी विकल्प की ओर ले गए, मगर अब भी उनका मकसद केवल कांग्रेस का ही विरोध करना नहीं है।

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