तो इस वजह से खेमका का खट्टर ने किया ट्रांसफर

khemkaआईएस ऑफिसर अशोक खेमका के समर्थन में कभी खुलकर आने वाली बीजेपी अब बुरी तरह से घिर गई है। जब हरियाणा में हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी तो बीजेपी खेमका के तबादले पर कहती थी कि ईमानदार ऑफिसर को परेशान किया जा रहा है। जब हरियाणा में बीजेपी सत्ता में आई तो उसे भी खेमका बर्दाश्त नहीं हुए। खेमका को सीएम खट्टर ने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पद से हटाकर लो प्रोफाइल आर्कियॉलजी ऐंड म्यूजियम्स डिपार्टमेंट में भेज दिया है। 23 साल के करियर में खेमका को 45 बार ट्रांसफर की ‘सजा’ मिली है।
इस ट्रांसफर के बाद 49 साल के खेमका ने ट्वीट किया, ‘बेहद कम गुंजाइश के बाद भी मैंने ट्रांसपोर्ट डिपार्टेमेंट में भ्रष्टाचार से जूझने की कोशिश की। एक बार फिर से मेरा ट्रांसफर दुख पहुंचाने वाला है।’ जब वाड्रा मामले में खेमका को कांग्रेस सरकार ने ट्रांसफर किया था तो बीजेपी ने इसका तीखा विरोध किया था।

हालांकि खेमका के तबादले के फैसले पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने विरोध जताया है। विज ने कहा कि खेमका ने कांग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार खत्म करने में अहम भूमिका अदा की थी। उन्होंने कहा कि मैं खेमका के साथ हूं और उनके तबादले का विरोध करता हूं। प्रदेश के ट्रांसपोर्ट मंत्री रामविलास शर्मा का कहना है कि खेमका का ट्रांसफर रूटीन के सिवा कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रांसफर कोई सजा और नीचे दिखाने के लिए नहीं है।
एनडीटीवी के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि खेमका और ट्रांसपोर्ट मंत्री में खुलकर विरोध सामने आ रहे थे। दिसंबर में खेमका ने जिला अधिकारियों को ओवरलोड मामले में गाड़ियों पर पेनल्टी लगाने का आदेश दिया था। खबर है कि इस आदेश से राजनीतिक रूप से शक्तिशाली लोगों की माइनिंग लॉबी में गुस्सा था। इसी गुस्से का नतीजा खेमका का ट्रांसफर है। खेमका को पिछले साल मनोहर लाल खट्टर सरकार ने ही ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट का प्रभार सौंपा था। प्रदेश में बीजेपी की पहली बार सरकार बनी है। विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार को अहम मुद्दा बनाया था। इस चुनाव में खेमका का ट्रांसफर भी एक मुद्दा था लेकिन बीजेपी अब खुद ही घिरती दिख रही है।

सोनिया गांघी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काइलाइट हॉस्पिटैलिटी और रीयल एस्टेट डीएलएफ के बीच गुड़गांव में 3.5 एकड़ जमीन की 58 करोड़ रुपए में हुई डील को जब खेमका ने कैंसल किया तब से वह हरियाणा में सरकारों को निशाने पर हैं। नवंबर 2012 से खेमका का प्रदेश में कई बार ट्रांसफर हो चुका है। कांग्रेस के सीनियर नेता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘खेमका के तबादले पर बीजेपी को जवाब देना चाहिए। बीजेपी ने खेमका के ट्रांसफर को बड़ा मुद्दा बनाया था। न मैं तबादले के साथ हूं और न खिलाफ लेकिन बीजेपी के दोहरे मानदंड को सबने देख लिया।’

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