दिवाली पर परिवार के सभी लोग पूजा करने के लिए पूजा कक्ष में एकत्रित हो गए हैं। इस दौरान किसी ने आवाज लगाई कि पंडित जी कहा है। यह सुनना था कि उन लोगों के बीच एक सीडी प्लेयर रखकर उसे चला दिया गया। फिर क्या था, म्यूजिक प्लेयर से वातावरण में पवित्र मंत्रों के उच्चारण की पवित्र ध्वनि गूंजने लगी और पंडित जी के निर्देश के अनुसार घर के लोग पूजा संपन्न करने में लग गए। यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि कुछ इसी तरह का नजारा इस बार राजधानी के बहुत से लोगों के घरों में देखने को मिल जाएगा।
जी हा, इस बार राजधानी के बाजारों में एक खास तरह की सीडी-डीवीडी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। इस सीडी में पंडित जी द्वारा दिवाली पूजन की विधि का परंपरागत मंत्रोच्चारण रिकार्ड किया गया है। सीडी में उच्चारणकर्ता न केवल पवित्र मंत्रों का उच्चारण करता है, बल्कि पूजन विधि परंपरागत ढंग से करने के लिए श्रोताओं को निर्देशित भी करता है। इसे सुनने पर ऐसा ही लगता है कि मानों कोई हमारे बीच में बैठकर ही मंत्रों का उच्चारण कर रहा हो और हमें पूजन विधि की जानकारी दे रहा हो। दिवाली पर लक्ष्मी पूजन में किस-किस तरह की विधि अपनानी चाहिए और परंपरागत क्या तरीका होना चाहिए, इसकी जानकारी भी नई पीढ़ी के लोगों को शायद अब कम रह गई है। यही कारण है कि इस बार मार्केट में ऐसी सीडी की बिक्री जोरों पर है, जिनमें पंडित जी द्वारा परंपरागत ढंग से की जाने वाली दिवाली पूजन की विधि एवं अन्य बातों की रिकार्डिग है।
ग्रेटर कैलाश मार्केट में इसी तरह की सीडी बेचने वाले दुकानदार रविंद्र ने बताया कि इस सीडी को बस पूजा के समय चलाना है। सीडी में मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और उसमें बोले जाने वाले निर्देशों का पालन करना होता है। सीडी में सबसे पहले निर्देशित किया जाता है कि पूजा में क्या-क्या सामग्री साथ रखनी है। इसके बाद विधिवत् ढंग से दिवाली पूजन शुरू किया जाता है। सीडी को सुनने पर बिलकुल ऐसा ही लगता है कि मानों आपके बीच में कोई पंडित बैठ कर आपकी पूजा संपन्न करा रहा हो। इस तरह की सीडी की उनकी मार्केट में खूब माग है।
पटाखे मानकों के अनुरूप नहीं
दिवाली पर सजे पटाखा बाजार में पटाखों पर कंपनियों ने चेतावनी तो लिख रखी है, जिसमें यह भी लिखा है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप, मगर मानक क्या हैं? यह कहीं नहीं लिखा है। कारण स्पष्ट है कि बाजार में पटाखों के इन मानकों को जाचने के लिए कोई एजेंसी भी मौजूद नहीं है। बाजार में मौजूद तेज आवाज वाले अधिकाश बड़े पटाखे 120 डेसीबल से अधिक आवाज वाले हैं, जबकि डाक्टर 90 डेसीबल से अधिक तेज आवाज को श्रवण शक्ति के लिए हानिकारक मानते हैं। कोर्ट के निर्देश पर सरकार की ओर से 65 डेसीबल आवाज तक के पटाखे बेचने की अनुमति है।