एनबीएफसी के विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डाटा की भूमिका

ऋण देने की प्रकिया की शुरुआत से लेकर ऋण लेने वाले के खाते में रकम पहुंचाने तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया को स्वचालित बनाने के लिए एनबीएफसी उत्कृष्ट श्रेणी की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रही हैं।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) उन उद्यमियों और व्यक्तियों की वित्तीय जरूरतें पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जो परम्परागत तौर पर बैंकों से वित्तीय सेवाएं लेने में नाकाम रहे हैं या इसके काबिल नहीं हैं। कुछ साल पहले तक ऐसा समझा जाता था ये गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां वैसे अनधिकृत क्षेत्रों के लोगों को बेवकूफ बनाती हैं जिनसे बैंक बचते रहे हैं या उन्हें नजरंदाज करते रहे हैं।

अयोग्य व्यक्तियों के साथ बैंकिंग करना असुरक्षित समझा जाता रहा है, लेकिन आज स्थिति ऐसी है कि बैंकिंग प्रणाली से दूर रहे और अयोग्य समझे जाते रहे लोगों को कारोबार की व्यापक क्षमता वाला समझा जाने लगा है। इसका श्रेय डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को जाता है, जिसकी बदौलत एनबीएफसी आर्टिफिशियल इंटलिजेंस (एआई), बिग डाटा एनालिटिक्स और कलन विधि (अलगोरिद्म) जैसे साधनों के इस्तेमाल से अपने मौजूदा एवं नये ग्राहकों की बेहतर, त्वरित और अपेक्षाकृत कम असुविधा एवं निम्न दोष वाली सेवा प्रदान कर रही हैं।

ज्यादातर एनबीएफसी में कम से कम ऋण की शुरुआती प्रक्रिया और ‘कस्टमर ऑन-बोर्डिंग’ का कार्य स्वचालित (ऑटोमेटेड) किया जा चुका है। ऋण के आवेदन ऑनलाइन और ऋणदाता कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से पंजीकृत किये जा रहे हैं। परम्परागत तौर पर बैंक के ऋण प्रपत्र भरने की प्रक्रिया और ऋण की मंजूरी में लंबा वक्त लगता रहा है। प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से अब ग्राहक अपने कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों यथा-लैपटॉप और मोबाइल के जरिये मिनटों में ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आधार डाटा के जरिये ग्राहकों का तत्काल ई-केवाईसी अथवा डिजिटल सत्यापन संभव हो जाता है।

जिस ऋण जोखिम अंकन की प्रक्रिया के लिए कई-कई लोग लगते थे और बड़ी मात्रा में पेपरवर्क करना होता था, वह अब प्रौद्योगिकी पर आधारित हो चुकी है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां वैकल्पिक क्रेडिट स्कोरिंग प्रणाली के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेशन (एआई), बिग डाटा एनालिसिस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स एवं अल्गोरिद्म के विकास पर भरोसा कर रही है। भविष्य में ऋण भुगतान में संभावित चूक (डिफॉल्ट) की व्याख्या, ग्राहकों के बारे में अनोखी जानकारियां हासिल करने और मनोमितिय (साइकोमिट्रिक) स्कोरिंग के लिए ऋण लेने वाले व्यक्ति के फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर व्यवहार का आकलन किया जाता है।

धोखाधड़ी की जांच एवं नये कस्टमर सेगमेंट में ऋण वितरण के लिए भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है। मोबाइल एवं स्मार्टफोन क्रांति के कारण निम्न आय वाला और साक्षर ही नहीं, बल्कि अशिक्षित व्यक्ति भी कर्ज के लिए अपना आवेदन दे सकता है, अपने ऋण की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकता है, ई-सत्यापन कर सकता है और भुगतान के लिए डिजिटल दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर सकता है।

यद्यपि प्रौद्योगिकियों के जरिये एनबीएफसी उन उद्यमियों और व्यक्तियों की वित्तीय जरूरतें पूरी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जो परम्परागत तौर पर बैंकों से वित्तीय सेवाएं लेने में नाकाम रहे हैं या इसके काबिल नहीं हैं, लेकिन जब ऋण कारोबार को सम्पूर्ण तरीके से डिजिटलीकृत करने की बात आती है तो इस क्षेत्र की ज्यादातर वित्तीय कंपनियों के रुख में अब भी एकरूपता नहीं है।

रिलायंस मनी के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) देवांग मोदी ने कहा, “एनबीएफसी का भविष्य आवेदन से लेकर ऋण वितरण की प्रक्रिया तक पूर्ण रूप से एकीकृत पश्च, मध्य एवं अग्रिम सेवाओं जैसे कारोबारी मॉडल से जुड़ा है, ताकि ऋण कारोबार को पूरी तरह से प्रौद्योगिकी आधारित बनाया जा सके। यह केवल ऋण आवेदन प्रक्रिया से लेकर वितरण की प्रक्रिया के स्वचालन तक पहुंचकर खत्म नहीं होता, बल्कि यह समाधानों से भी संबंधित है, जिससे कंपनियां कारोबारी घटनाओं, बाजार और ग्राहक की मांगों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनेंगी और मजबूत आधार तैयार होगा, जिसे तेजी से स्वीकार किया जा सके और सक्रिय ऋण उत्पादों की पेशकश बढ़ाई जा सके।”

रिलायंस मनी ने अपने सम्पूर्ण ऋण कारोबार अर्थात् आवेदन की प्रक्रिया से लेकर ऋण जोखिम अंकन, निर्णय लेने, ऋण वितरण होने तथा ऋण उत्पादों के त्वरित कस्टमाइजेशन की प्रक्रिया को डिजिटलीकृत करने के लिए विभिन्न वैश्विक प्रौद्योगिकी से कई करार किये हैं। शुरू से लेकर अंत तक डिजिटलीकरण की प्रक्रिया के साथ ही हम ऐसे युग में पहुंच चुके हैं जहां प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से यह निर्णय लिया जाने लगा है कि क्या संबंधित व्यक्ति ऋण पाने के लायक है या नहीं और उसे कितना ऋण मिलना चाहिए?
श्री मोदी ने कहा, “प्रौद्योगिकी अब ‘आरोग्यशास्त्र’ बन चुकी है और इस कारोबार में खुद को प्रासंगिक बनाये रखने के लिए इसके इस्तेमाल के अलावा और कोई उपाय नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “प्रौद्योगिकी से संबंधित नवोन्वेषणों ने एनबीएफसी को न केवल अपने कर्मचारियों और काम की प्रगति को उपयुक्त बनाने में सक्षम किया है, बल्कि इसने प्रतिवर्तन काल (टर्नअराउंड टाइम) बढ़ाने, बेहतर निर्णय क्षमता सुनिश्चित करने तथा मनमाफिक दरों पर ग्राहकों को ऋण उपलब्ध कराने में इन गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की मदद भी की है।”

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