पर्यूषण पर्व के समापन पर तपस्वियों का किया सम्मान

विदिषा,। पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व में मन, वचन, कर्म को एकाग्र कर ध्यान से मिलने से शारीरिक क्रिया निर्मल होती है। पर्यूषण पर्व में दूसरों की त्रुटियों को भूल जाना एवं क्षमा ग्रहण करना प्रमुख कर्तव्य है। क्षमा जो ग्रहण करते है उनका जीवन अमृतमय होता है। उक्त विचार जैन श्वेताम्बर समाज के पर्यूषण पर्व के समापन के अवसर पर आयोजित क्षमावाणी पर्व एवं तपस्वियों के सम्मान समारोह में पूज्य हर्ष वंदना महाराज साहब ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि तपस्या कर शरीर को कष्ट देना शूरवीरता है। तपस्या से कर्मो की निर्झरा होती है। मानव बनने के लिए जीवन में तयाग आवष्यक है। इस अवसर पर अचल गच्छ कच्छी जैन संघ ने उषा बेन जालौरी, राखी नवीन सांवला, हर्षा नरेष सावला, भावना मनीष गड़ा, अक्षत सावला, अक्षिता सावला, सुभाष भंडारी एडवोकेट, सुंदरबाई भंडारी, झूली संदीप गांदिया, ज्योति खुषाल शाह, रश्मि गिरीष सावला आदि आठ से अधिक उपवास, सिद्वी तप, निगोद तप, करने वाले तपस्वियों का सम्मान किया गया। तपस्वियों के सम्मान एवं अनुमोदना हेतु श्रीजी के साथ चल समारोह निकाला गया, जिसमें महिलाऐं द्वारा गुजराती गरबे की प्रस्तुति दी गई। पूज्य महाप्रज्ञा साहब जी की निश्रा में श्रीजी को अतुल सावला परिवार द्वारा विराजित किया गया। प्रातः मंदिर के पट खोलने का लाभ लोकेष मुलजी नागड़ा परिवार को प्राप्त हुआ। चल समारोह में राघवजी भाई, ज्योति शाह, राजेष जालौरी, त्रिलोक सांवला, विषन सावला, अतुल शाह, विनोद शाह, हंसमुख शाह, धमेन्द्र शाह, दीपेष शाह, अमृतलाल शाह, किषोर शाह, रतीलाल भाई सहित भोपाल, गंजबासौदा, गुलाबगंज आदि स्थानों के समाजजन उपस्थित थे। संचालन अतुल शाह हाईलैंस ने किया।

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