नये भारत के निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका: प्रणव सरस्वती

नई दिल्ली, 30 अगस्त 2021
लायंस क्लब नई दिल्ली अलकनंदा द्वारा श्रीमद् दयानन्द वेदार्ष महाविद्यालय में शिक्षक दिवस पर शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें हिन्दी प्रवक्ता श्रीमती विनीता काम्बीरी, असिटेंट प्रोफेसर डाॅ. महेश चैधरी, श्री रजनीकांत शुक्ल, श्री विजयसिंह एवं श्री आनन्द आर्य को उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में प्रदत्त उल्लेखनीय योगदान के लिये शिल्ड, शाॅल, प्रशस्ति देकर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय के आचार्य श्री प्रणव आचार्य सरस्वती के सान्निध्य में आयोजित इस समारोह में वक्ताओं ने बच्चों के साथ-साथ राष्ट्र-निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हुए कहा कि शिक्षा क्रांति के साथ-साथ शिक्षक क्रांति की अपेक्षा है। समारोह के मुख्यअतिथि रिजनल चेयरमैन लाॅयन हरीश गर्ग थे एवं अध्यक्षता क्लब के अध्यक्ष श्री ललित गर्ग ने की। पूर्व अध्यक्ष श्री महेश बंसल, पूर्व अध्यक्ष श्री सुनीलकुमार अग्रवाल, क्लब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री अदीपवीर जैन, श्री भीमसेन गोयल, श्री मनोज थरड, श्री विक्रम राठी, डाॅ. सुरेन्द्र बाहेती आदि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए नये भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को एक महान् शिक्षक, चिन्तक एवं दार्शनिक बताया।
महाविद्यालय के आचार्य श्री प्रणव आचार्य सरस्वती ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु-शिष्य परम्परा भारत की संस्कृति का आदर्श है। आज शिक्षा के क्षेत्र में पनप रही हिंसा, मारकाट, आर्थिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए इस अमूल्य गुरु-शिष्य परम्परा पर प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों दोनों का ही दायित्व है कि वे इस महान् परम्परा को बेहतर ढंग से समझें और एक अच्छे समाज निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करें। समारोह के अध्यक्ष श्री ललित गर्ग ने कहा कि प्राचीन काल में शिक्षा का उद्देश्य ‘सा विद्या या विमुक्तये’ रहा अर्थात विद्या वही है, जो मुक्ति दिलाये। आज शिक्षा का उद्देश्य ‘सा विद्या या नियुक्तये’ हो गया है अर्थात विद्या वही जो नियुक्ति दिलाये। यही कारण है कि आज शिक्षा मिशन न होकर व्यवसाय हो गया है, जिसके कारण शिक्षकांे की गरिमा भी धुंधली हुई है। श्री हरीश गर्ग ने कहा कि विद्यार्थी जीवन का पूरा दर्शन जीवन काल की नींव होता है। डाॅ. महेश चैधरी ने भगवान श्रीकृष्ण तथा डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन पर प्रकाश डाला। एफ.एम उद्घोषिका एवं शिक्षिका श्रीमती विनीता काम्बीरी ने सेना में अनुशासन से जुड़े श्री सचिन के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षा में अनुशासन एवं समर्पण का सर्वाधिक महत्व है। श्री रजनीकांत शुक्ल ने बहादुर बच्चों की चर्चा करते हुए कहा कि यह बहादुरी शिक्षकों की बदौलत ही छात्रों में पैदा होती है।
कार्यक्रम का प्रारंभ गुरुकुल के बच्चों के मंगलाचरण से हुआ। संयोजन क्लब के सचिव श्री अभिषेक जैन ने करते हुए पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से प्राचीन शिक्षा एवं शिक्षक के महत्व को उजागर किया। आभार ज्ञापन लाॅयन अदीप वीर जैन ने किया।

(ललित गर्ग)
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