कैंडल की लौ से निकली बदलाव की नई रोशनी

शाम ढल गई, मोमबत्ती की लौ भी कुछ दिनों में बेशक बुझ जाएगी लेकिन इन्साफ की लड़ाई जारी रहेगी। पीड़िता ने पूरे देश को इन्साफ की लड़ाई लड़ने के लिए एक जुट किया है। आज लोगों के लिए वह एक प्रेरणा बन गई है। पीड़िता की आत्मा की शांति के लिए जलाई गई मोमबत्ती की रोशनी से बदलाव की जो छवि बाहर आई है उसे धूमिल नहीं होने देना है। पीडि़ता की मौैत हो गई लेकिन लोगों के दिलों का दर्द कहीं भी कम नहीं हुआ। लोगों का प्रदर्शन आज भी जारी है।

सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की मौत के दूसरे दिन रविवार को हाथों में जलती हुई मोमबत्तियां लेकर उसे श्रद्धांजलि देने जंतर-मंतर पहुंचने वाले लोगों का हुजूम लगातार बढ़ता ही जा रहा था। सड़क पर जिसे जहां जगह मिली, वहीं मोमबत्ती लगाकर श्रद्धांजलि देने लगे। अलग-अलग जगह पर समूहों में मोमबत्तियां जल रही थीं। किसी ने सड़क पर दामिनी लिखकर उस पर मोमबत्तियां लगाई। हवा के झोकों से मोमबत्तियों की लौ फड़फड़ाती और आपस में टकराती रही, कभी मद्धिम तो कभी तेज पड़ने लगती, लेकिन इस लौ में नारी की आजादी व सुरक्षा की तड़प दिखाई थी, उससे एक ऐसे आंदोलन की रोशनी निकल रही थी, जो शायद अब मद्धिम पड़ने वाली नहीं है। यह आंदोलन न केवल शासन तंत्र में आमूलचूल परिवर्तन के लिए है, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ है, जो महिला की सुरक्षा व उसके हितों पर प्रहार करती है।

सरोजनी नगर से कैंडल लेकर पहुंची शिल्पा कहती हैं कि हमें मेट्रो, बसों व सार्वजनिक जगहों पर लड़कियों को गलत नीयत से घूरती हर निगाहों का अब विरोध करना पडे़गा। पटेल नगर से यहां पहुंचे मनीष कहते हैं कि ऐसी निगाहों के प्रतिकार में महिला से पहले पुरुष को ही खड़ा होना होगा, तभी हालात बदलेंगे और लोगों की सोच बदलेगी। जंतर मंतर पहुंच रहे महिला-पुरुष, युवक-युवती, छात्र- छात्राएं गमजदा थे कैंडल मार्च निकाल रहे लोगों की आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन गुस्सा भी कम नहीं था, वे गुस्से को दबाने की कोशिश कर थे। बावजूद इसके गुस्सा तो जुबां पर आ ही जाता है। .वह हमें अलविदा कह कर चली गई, उसकी याद में हम यहां कैंडल जलाने पहुंचे हैं, कैंडल की लौ कुछ देर में बेशक बुझ जाएगी, लेकिन उसका संघर्ष हमें हमेशा प्रेरित करता रहेगा। .बस अब बहुत हो गया, अब ऐसा नहीं चलने देगें, यह कहते हुए तेजी से आगे बढ़ती एक युवती सड़क पर ढोलक की थाप पर जोशीले गीत गा रहे युवाओं के जत्थे में शामिल हो जाती हैं। गीत समाप्त होने पर वह युवती दाहिने हाथ की मुठ्ठी भींच कर आसमान की तरफ उठाती है और पूरी ताकत से कहती हैं कि बी वांट जस्टिस. और यह नारा फिजां में गूंजने लगता है।

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