सोहनी महिवाल (संगीतमय नाटक) का रुबरु थिएटर के कलाकारों द्वारा किया गया मंचन

उर्दू अकादमी दिल्ली द्वारा आयोजित उर्दू ड्रामा फेस्टिवल 2024 में रुबरू की प्रस्तुति
नई दिल्ली । सोहनी महिवाल (संगीतमय नाटक) का श्री राम सेंटर मंडी हाउस सभागार में रुबरु थिएटर के कलाकारों द्वारा मंचन किया गया ।
इस नाटक का लेखन और निर्देशन काजल सूरी ने किया । पंजाब की लोककथाएं प्रेम और अनुराग के संबंधों में धड़कती कहानियाँ हैं। इसलिए कि भारत की आजादी से पहले, पाकिस्तान में स्थित क्षेत्रों में भी ये गूँज छोड़ रही हैं। लोकगीतों में इनके संदर्भ टप्पे, सिट्ठणियाँ, बोलियाँ, गिद्दे अथवा भाँगड़े उभरते हैं । अविभाजित पंजाब में लोककथाओं की भरपूर विरासत है। लोक-व्यवहार, लोक-परंपरा से लेकर लोक-गीतों में भी हमारे यहाँ कहानियों की भरमार है। हीर-रांझा, सस्सी-पुन्नू, शीरी-फरहाद या सोहनी-महिवाल जैसी सैकड़ों प्रेमकथाएं हैं, जिनमें लोक-रंग गहरा उभरा है और इन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी हम सुनते आए हैं।
नाटक सोहनी महिवाल, कहानी है अविभाजित भारत के पंजाब प्रान्त की, सोहनी और महीवाल की।(पंजाबी भाषा में सोहनी अर्थ है खूबसूरत और महिवाल का अर्थ है भैंस बकरी चराने वाला चरवाहा)
एक कुम्हार के घर में पैदा होने वाली सोहनी थी ही इतनी सुंदर की, उसका नाम ही सोहनी रख दिया। जब वो बड़ी हुई तो एक व्यापारी जो की मटके ख़रीदने गया था, सोहनी की एक झलक पाते ही सोहनी से इश्क़ कर बैठा। लेकिन जब गाँव वालों को इसकी भनक लगी तो सोहनी के बाप को कह कह के उसकी शादी किसी और से करवा दी गयी।वो व्यापारी जिसकी सारी पूँजी मटके ख़रीदने में ख़त्म हो गई थी और जो सोहनी के गाँव में भैंसे चराने लगा था, वो महीवाल के नाम से जाना जाने लगा, रोज़ चिनाब नदी पार करके सोहनी से मिलने आता था। सोहनी भी घड़े का सहारा ले कर चिनाब ज़ैसे दरिया को पार करती थीं। लेकिन क़िस्मत की कुछ और ही मंज़ूर था। एक रोज़ उसकी ननद पक्के मटके को कच्चे मटके से बदल देती है जो पानी में आसानी से घुल जाता है। इस संगीतमय नृत्य नाटक में
कलाकारों में जसकिरन चोपड़ा, अन्नु शर्मा, शुभम शर्मा ,सचिन ठाकुर, रोज़ सैनी, आफताब, कृष बब्बर, संदीप कुशवाहा, स्पर्श रॉय, नेहा खन्ना, प्रियंका, तनीषा, गांधी, दीपक, गीता सेठी, अवनीत कौर, बिंदिया, आशा खन्ना,
शिवानी, मुस्कान ने अपने अभिनय और भावपूर्ण पारंपरिक नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया।

मेकअप रशीद दा ने किया, संगीत संचालन जेरीरॉय, प्रकाश संचालन सुनील चौहान ने किया । बैक स्टेज को गौतम जायसवाल, देवांशु और दीपक मोरियाल ने संभाला। प्रोडक्शन कोऑर्डिनेटर रोहित कुमार रहे । पंजाब की इस मशहूर और भावपूर्ण कहानी को देखने के लिए सभागार में दर्शकों की भीड़ उमड़ी थी। ये प्रस्तुति दर्शकों के दिलों पर आपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह सफल रही।

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