नई दिल्ली, 4 अप्रैल, 2025: भारतीय शास्त्रीय संगीत के बहुप्रतीक्षित वार्षिकोत्सव भीलवाड़ा सुर संगम का 12वां संस्करण भव्यता के साथ संपन्न हो गया है। नई दिल्ली स्थित कमानी ऑडिटोरियम में श्रोताओं ने संगीत की उत्कृष्टता के इस दो दिवसीय उत्सव का आनंद उठाया। देश में सुर एवं संगीत की दुनिया के उत्कृष्ट लोगों को एक मंच पर लाते हुए एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप द्वारा आयोजित यह उत्सव एक बार फिर भारत की समृद्ध संगीत विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने की अपनी प्रतिबद्धता पर खरा उतरा है।
उत्सव की शुरुआत 2 अप्रैल, को पूर्बयन चटर्जी के सितार वादन से हुई। उन्होंने सभी श्रोताओं को अपनी तकनीकी क्षमता एवं कला की गहरी समझ से स्तब्ध कर दिया। उनके बाद पंडित साजन मिश्रा एवं स्वरांश मिश्रा के गायन ने शाम को नई ऊंचाई दी। दिल को छू लेने वाले उनके गायन ने उपस्थित लोगों को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गहराइयों का अनुभव करने का मौका दिया।
उत्सव के दूसरे दिन 3 अप्रैल, को पंडित प्रत्युष बनर्जी ने अपने सरोद वादन से उत्सव को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। उनकी प्रस्तुति में सुर एवं लय के अनूठे संगम ने सभी संगीत पारखियों का दिल जीत लिया। ग्रैंड फिनाले के लिए पंडित उल्हास कशालकर ने गायन प्रस्तुति दी। शास्त्रीय रागों के साथ उनके कालातीत प्रदर्शन ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। इस प्रतिष्ठित संगीत उत्सव के समापन के लिए उनके गायन से बेहतर कुछ नहीं हो सकता था।
भीलवाड़ा सुर संगम 2025 की सफलता पर एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप के चेयरमैन श्री रवि झुनझुनवाला ने कहा, ‘भारत में सांस्कृतिक एवं संगीत विरासत की बड़ी पूंजी है, जो विविधता से पूर्ण है और सदियों में विकसित हुई है। भीलवाड़ा सुर संगम के माध्यम से एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप साल दर साल भारतीय शास्त्रीय संगीत को संरक्षित एवं संवर्धित करने की प्रतिबद्धता दिखा रहा है। एक बार फिर देश में सुर एवं संगीत के प्रतिष्ठित नामों को एक मंच पर लाने को लेकर हम गौरवान्वित हैं। हम भारतीय संगीत की शाश्वत सुंदरता का उत्सव मनाने की परंपरा को बनाए हुए हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि पीढ़ियों तक इसकी गूंज बनी रहे।’
एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप ले ओएसडी रजनीश वर्मा ने बताया की दो दिनों में 1200 से ज्यादा लोगों की मौजूदगी के साथ भीलवाड़ा सुर संगम का एक और संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। श्रोताओं को परंपरा, कला एवं भारतीय रागों की खूबसूरती का यादगार अनुभव देते हुए उत्सव ने शास्त्रीय संगीत के प्रमुख मंच के रूप में भीलवाड़ा सुर संगम की पहचान को मजबूती दी है।