थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की सहायता के लिए अल्पायु से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय दिव्यांश मेहरोत्रा ने मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। कोरोना काल से ही समाजसेवा में रुचि रखने वाले दिव्यांश पिछले चार महीनों से सदर अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक लगातार प्रयासरत रहे, ताकि थैलेसीमिया ग्रसित बच्चों को समय पर रक्त मिल सके।
रक्त की कमी को देखते हुए दिव्यांश ने प्रशासन और चिकित्सा विभाग से संवाद किया। उन्होंने SP, DSP, सर्जन और मेडिकल स्टाफ से भेंट कर समस्या के समाधान के लिए निरंतर पहल की।
इसी क्रम में आज मेडिकल कॉलेज में SP साहब के निर्देश पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कराया गया। शिविर की शुरुआत SP साहब ने स्वयं रक्तदान कर की। उन्होंने दिव्यांश की प्रशंसा करते हुए कहा—
“इतनी कम आयु में दिव्यांश ने अकेले इतना बड़ा कार्य किया है, यह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है।”
शिविर में पुलिस कर्मियों, नागरिकों और मेडिकल टीम ने बड़ी संख्या में स्वैच्छिक रक्तदान किया। मेडिकल स्टाफ पूरी तत्परता के साथ सेवा में जुटा रहा।
दिव्यांश की प्रेरणा उनकी माता रचना मेहरोत्रा, जिन्हें क्षेत्र में ‘जीजाबाई’ के सम्मानित रूप में जाना जाता है, से मिली है। उनकी प्रेरणा और दिव्यांश की जिजीविषा मिलकर मानवता की नई मिसाल कायम कर रही है।