मंजुल प्रिया के सुरम्य सभागार में डॉ पूनम सिन्हा की अध्यक्षता में डॉ लोकनाथ मिश्र के काव्य संग्रह _संवाद अधूरा सा_ का लोकार्पण साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ, जहाँ मुख्य अतिथि डॉ महेंद्र मधुकर ने संवाद की साक्षरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रतिकूलताओं में भी कवि अपनी मानसिक व्यथा को कविता के माध्यम से अभिव्यक्त करता है और कविता मूलतः स्वयं से या पाठकों से किया गया संवाद ही है, वहीं पटना से पधारे हिंदी और भोजपुरी के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ सुनील कुमार पाठक ने मिश्र की कविताओं में संवेदना, जन पक्षधरता और मानवीय कल्याण के संघर्षों के प्रति प्रतिबद्धता के स्वरों को रेखांकित किया, संचालक डॉ संजय पंकज ने बताया कि डॉ लोकनाथ मिश्र मिश्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में समान सहजता से भावों को व्यक्त करते हैं और यह संग्रह पाठकों से सार्थक संवाद रचने में सक्षम है, भोजपुरी के विद्वान डॉ ब्रजभूषण मिश्र ने कविताओं की सराहना करते हुए डॉ. मिश्र से निरंतर लेखन का आग्रह किया ताकि पाठकों को सृजन का नया आस्वाद मिलता रहे, इस अवसर पर डॉ वंदना विजयलक्ष्मी ने संग्रह से कविताओं का सुमधुर पाठ किया,विश्वविद्यालय अंग्रजी विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. अनीता सिंह ने कहा कि किस प्रकार समान्य सी बातें भी जब कवि के शब्दों में अभिव्यक्त होती हैं,तो उसका गहरा प्रभाव होता है और डॉ. लोकनाथ मिश्र की कविताएँ सार्थक रूप से प्रतिसंवेदना करती हैं। अंगवस्त्र पहनाकर सभी आगत अतिथियों का स्वागत किया गया।इस अवसर पर सविता राज, डॉ.विनोद कुमार सिन्हा, हरिकिशोर प्रसाद सिंह,उत्तम कुमार,उमानाथ सिंह इन सभी की गरिमामयी उपस्थिति रही।उपन्यासकार श्री देवेंद्र कुमार ने आत्मीय धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर इस काव्यमय संवाद को पूर्णता प्रदान की।