मरीज की दोनों बेटियों ने अपने पिता को एंड-स्टेज लिवर रोग से बचाने के लिए अपने लिवर के हिस्से दान किए

फोर्टिस नोएडा ने किर्गिस्तान के 51-वर्षीय मरीज की जीवन रक्षा के लिए ‘लैपरोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट’ किया जो कि दुनियाभर में अपनी किस्म का पहला मामला है

मरीज की दोनों बेटियों ने अपने पिता को एंड-स्टेज लिवर रोग से बचाने के लिए अपने लिवर के हिस्से दान किए

– दुनिया में अपनी तरह के इस पहले मामले मेंदोनों डोनर्स की लिवर डोनेशन सर्जरी मिनीमॅली इन्वेसिव लैपरोस्कोपिक तकनीकों की सहायता से की गई –

 

नई दिल्ली, 19 जुलाई, 2026: फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने एक शानदार उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराते हुए दुनिया में पहली बार लैपरोस्कोपिक डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस जटिल प्रक्रिया को किर्गिस्तान के 51-वर्षीय मरीज पर किया गया जो हेपेटाइटिस बी इंफेक्शन से प्रभावित होने के बाद एंड-स्टेज लिवर रोग से ग्रस्त हो चुके थे। डॉ विवेक विजचेयरमैनलिवर ट्रांसप्लांट एंड हेपाटोबिलियरी साइंसेज़फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा के नेतृत्व मेंअस्पताल की मल्टीडिसीप्लीनरी ट्रांसप्लांट टीम द्वारा की गई इस सर्जरी के परिणाम सकारात्मक रहे। सर्जरी के बादमरीज को स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दी गईजबकि उनकी दोनों बेटियों ने भीजिनकी उम्र 20 और 21 वर्ष थीठीक प्रकार से स्वास्थ्यलाभ कर लिया है और अब उनकी हालत ठीक है।

दुनिया में यह अपनी किस्म का पहला मामला हैजिसमें दोनों डोनर्स की लिवर डोनेशन सर्जरी को मिनीमॅली इन्वेसिव लैपरोस्कोपिक तकनीकों की सहायता से किया गयाजिसके परिणामस्वरूप उन्हें कम दर्द हुआछोटे आकार के चीरे लगाने से सर्जरी के बाद कम तकलीफ से गुजरना पड़ा और रिकवरी भी तेजी से हुई। प्रत्येक डोनर सर्जरी करीब पांच घंटे चली जबकि रेसिपिएंट ट्रांसप्लांट

 

 

सर्जरी को लगभग आठ घंटे में पूरा किया गया। मरीज के शरीर से निकाले गए लिवर की बाद में जांच से क्रोनिक हेपेटाइटिस की पुष्टि हुई जो हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस डी इंफेक्शन की वजह से हुआ था। साथ हीलिवर को नुकसान भी काफी अधिक पहुंचा था।

मरीज को डीकम्पन्सेटेड क्रोनिक लिवर रोग (लिवर फेलियर की गंभीर स्टेज जिसमें मरीज जॉन्डिस से पीड़ित होता है) की शिकायत के साथ फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा में भर्ती किया गया था। वह जॉन्डिसरेकरेन्ट एसाइटिस (पेट में अत्यधिक मात्रा में तरल पदार्थ के असामान्य रूप से एकत्र होना)गैस्ट्रोइंस्टेस्टाइनल ब्लीडिंग तथा ऑल्टर्ड कॉन्शसनेस (चेतना में बदलाव) से भी पीड़ित थे। मरीज की विस्तृत मेडिकल जांच से लिवर फेलियरपोर्टल हाइपरटेंशनगंभीर किस्म के थ्रोम्बोसाइटोपीनिया (ऐसी मेडिकल कंडीशन जिसमें खून में प्लेटलेट्स की संख्या असामान्य रूप से कम हो जाती है) तथा खून का थक्का जमने में परेशानी जैसी समस्याओं की भी पुष्टि हुई। मरीज की मेटाबोलिक जरूरतों को देखते हुए सिंगल डोनर ग्राफ्ट अपर्याप्त थातब ट्रांसप्लांट टीम ने मरीज की दोनों बेटियों द्वारा दिए गए लिवर ग्राफ्ट की मदद से डुअल-लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करने का फैसला किया।

इस मामले की जानकारी देते हुएडॉ विवेक विजचेयरमैनलिवर ट्रांसप्लांट एंड हेपाटोबिलियरी साइंसेज़फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने कहाडुअल लोब लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांटेशन वास्तव मेंट्रांसप्लांट सर्जरी के क्षेत्र में तकनीकी दृष्टि से सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण मानी जाती है और दुनिया में कुछ गिने-चुने केंद्रों पर ही इसे किया जाता है। दोनों डोनर्स के मामले में इसे पूरी तरह से लैपरोस्कोपिक तरीके से करना लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांटेशन की भी प्रमुख उपलब्धि है। इस मिनीमॅली इन्वेसिव तकनीक से मरीज को कम दर्द होता हैरक्तस्राव भी कम होता है और अस्पताल में रुकने तथा रिकवरी के समय में भी कमी आती हैऔर साथ हीडोनर सुरक्षा के सर्वोच्च मानकों का भी पालन सुनिश्चित किया जाता है। इस उपलब्धि ने उन मरीजों के लिए भी उम्मीद दिखायी है जिन्हें बड़े लिवर ग्राफ्ट वॉल्यूम की आवश्यकता है और साथ हीयह लिविंग डोनर्स की सुरक्षा तथा रिकवरी में भी सुधार करती है। यह डोनर की सुरक्षा के साथ समझौता किए बगैर सर्जरी के ट्रॉमा को भी कम करती हैऔर इस तरह से हम उक्त मामले में डोनर्स की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखने के साथ-साथ ऐसे मरीज के लिए जीवनरक्षक प्रत्यारोपण को सफलतापूर्वक अंजाम दे सके जो अन्यथा लिवर रोग के गंभीर होने के साथ-साथ अपरिवर्तनीय लिवर फेलियर के शिकार बन सकते थे।

मोहित सिंहज़ोनल डायरेक्टरफोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने कहा, ट्रांसप्लांट संबंधी इस उपलब्धि ने क्लीनिकल उत्कृष्टता और नवाचार की दिशा में हमारे अथक प्रयासों को प्रदर्शित किया है। इसने न केवल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांटेशन की सीमाओं में विस्तार किया है बल्कि फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा की बेहद जटिल किस्म के लिवर ट्रांसप्लांटेशन की भरोसेमंद वैश्विक मंजिल के तौर पर भी साख बढ़ायी है।

फोर्टिस हेल्‍थकेयर लिमिटेड के बारे में

फोर्टिस हेल्‍थकेयर लिमिटेड भारत में अग्रणी एकीकृत स्‍वास्‍थ्‍य सेवा प्रदाता है। कंपनी के हेल्थकेयर वर्टिकल्स में मुख्यतः अस्पताल, डायग्नॉस्टिक्स तथा डे केयर विशेषज्ञ सेवाएं शामिल हैं। वर्तमान में, कंपनी देश भर के 12 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में कुल 36 हेल्थकेयर सुविधाओं )जिनमें जेवी और ओ एंड एम शामिल हैं) का संचालन करती है। कंपनी के नेटवर्क में 6,000 से अधिक ऑपरेशनल बेड्स (ओ एंड एम समेत) तथा 400 डायग्नॉस्टिक्स लैब्स शामिल हैं।

आईएचएच हेल्थकेयर (आईएचएच) के बारे में

आईएचएच अग्रणी बहुराष्ट्रीय हेल्थकेयर प्रदाता है जो मरीजों की देखभाल के भविष्य को नया स्वरूप देने के लिए लगातार प्रयासरत और मरीज-केंद्रित देखभाल की आकांक्षा से संचालित होता है। हम मेडिकल उत्कृष्टता और नवाचार का मेल कराते हुए, अपने भरोसेमंद ब्रैंड्स – एसिबाडेम, ग्लेनईगल्स, फोर्टिस, आइलैंड, माउंट एलिज़ाबेथ, पेंटाई, पार्कवे और प्रिंस कोर्ट के माध्यम से लगातार अपने प्रयासों को और मजबूती दे रहे हैं। मलेशिया, सिंगापुर, तुर्किए, भारत और ग्रेटर चीन समेत दुनिया के 10 देशों में, 89 से अधिक अस्पतालों समेत, हमारी 190 हेल्थकेयर सुविधाओं के भीतर और बाहर, 76,000 पेशेवरों की टीम प्रतिदिन वर्ल्ड-क्लास उत्कृष्टता प्रदान करने के लिए तत्पर रहती है। हम हेल्थकेयर के सभी क्षेत्रों में अपनी विस्तृत सेवाएं प्रदान करते हैं, जिनमें प्राइमरी और एंबुलेटरी, क्वाटर्नरी केयर, डायग्नॉस्टिक्स, इमेजिंग, रीहेबिलिटेशन, टेलीहेल्थ और होम केयर शामिल हैं।

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