स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक के बाद आशा कर्मी यूनियन ने कहा— केवल प्रशंसा नहीं, सम्मान और सुरक्षा चाहिए

कोलकाता, 4 अगस्त। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य भवन में स्वास्थ्य मंत्री शारद्वथ बंद्योपाध्याय के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद आशा कर्मी यूनियन के राज्य नेतृत्व ने बैठक के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी। यूनियन ने कहा कि मृत आशा कर्मी रूम्पा मंडल की घटना के बाद सरकार को जल्दबाजी में यह बैठक बुलानी पड़ी और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
यूनियन की राज्य सभानेत्री कृष्णा प्रधान और राज्य सचिव इस्मत आरा खातून ने संयुक्त रूप से बताया कि बैठक में स्वास्थ्य मंत्री शारद्वथ बंद्योपाध्याय, मुख्य सचिव नारायण स्वरूप निगम, स्वास्थ्य निदेशक स्वप्न सोरेन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी तथा विधायक चंदना बाउरी उपस्थित थीं।
यूनियन के अनुसार, बैठक की शुरुआत मृत आशा कर्मी के परिजनों और बांकुड़ा की आशा कर्मियों के साथ लंबी चर्चा से हुई। इस दौरान विधायक चंदना बाउरी की विवादित टिप्पणी का मुद्दा भी उठा। यूनियन का दावा है कि स्वास्थ्य मंत्री ने बैठक में इस टिप्पणी की जिम्मेदारी स्वीकार की तथा यह स्पष्ट हुआ कि विधायक का व्यवहार उचित नहीं था।
बैठक में ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि आशा कर्मी लाभार्थी के घर, अपने घर अथवा जहां संभव हो वहां ई-केवाईसी कर सकती हैं। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो लाभार्थियों को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) या निर्धारित शिविरों में भेजा जा सकता है।
यूनियन ने बताया कि सरकार मृत आशा कर्मी के परिवार को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। साथ ही मृत कर्मी के पति को उपयुक्त रोजगार उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया गया है।
बैठक में यूनियन ने अपनी अन्य मांगें भी रखीं। इनमें ड्यूटी के दौरान मृत होने वाली आशा कर्मी के परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा तथा आशा कर्मियों के लिए मातृत्व अवकाश की व्यवस्था प्रमुख रूप से शामिल है। सरकार ने इन मांगों पर भी सकारात्मक रूप से विचार करने का भरोसा दिया है।
यूनियन ने विभिन्न जिलों में आशा कर्मियों के साथ कथित राजनीतिक उत्पीड़न और अपमानजनक टिप्पणियों का मुद्दा भी उठाया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सभी जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी स्पष्ट संदेश भेजा जाएगा कि ऐसी घटनाएं रोकी जाएं।
यूनियन नेताओं के अनुसार, बैठक के दौरान आशा कर्मियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल प्रशंसा से उनका काम नहीं चलेगा। उन्हें कार्यस्थल पर सम्मान, सुरक्षा और उचित अधिकार चाहिए। बैठक के दौरान कई बार माहौल गर्म भी हुआ, लेकिन किसी भी कर्मी ने अपनी बात रखने में संकोच नहीं किया।
यूनियन ने आरोप लगाया कि आशा कर्मी रूम्पा मंडल की मृत्यु के बाद सरकार अपनी छवि बचाने और नुकसान की भरपाई (डैमेज कंट्रोल) के उद्देश्य से तत्काल बैठक बुलाने के लिए मजबूर हुई। उनका कहना है कि यदि यूनियन और संबंधित क्षेत्र की आशा कर्मियां एकजुट होकर विरोध नहीं करतीं तो यह बैठक शायद नहीं होती।
यूनियन ने सभी आशा कर्मियों से अपील की है कि जहां मंगलवार को शोक दिवस नहीं मनाया जा सका, वहां बुधवार को सभी स्वास्थ्यकर्मी काला बैज धारण कर दिवंगत आशा कर्मी को श्रद्धांजलि दें। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अधिक संगठित, साहसी और सतर्क रहने का भी आह्वान किया गया है।

Leave a Comment

This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

error: Content is protected !!