जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश की 85 फीसद ग्रामीण आबादी आज भी प्रदूषित पेयजल पर निर्भर है। ज्यादातर राज्यों में भूजल ही एकमात्र साधन है, जो प्रदूषित है। इसे गंभीर समस्या करार देते हुए सरकार ने पाइप से जलापूर्ति करने की योजना तैयार की है। हालांकि, योजना पर अमल के लिए सरकार धन की कमी से जूझ रही है।
राज्यों के पेयजल मंत्रियों के सम्मेलन में मंगलवार को केंद्रीय पेयजल व स्वच्छता राज्य मंत्री भरत सिंह सोलंकी ने प्रदूषित जलापूर्ति पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारी निवेश की जरूरत है। राज्यों में पेयजल प्रणाली के रखरखाव की खामियों से समस्या और नाजुक हो गई है। सोलंकी ने कहा कि देश की एक चौथाई ग्रामीण जनता को आज भी औसतन आधा किमी दूर से पेयजल ढोकर लाना पड़ता है।
मणिपुर, त्रिपुरा, ओडिशा, मेघालय, झारखंड और मध्य प्रदेश में पेयजल की हालत सबसे ज्यादा खराब है। देश की 85 फीसद ग्रामीण जनता जहां भूजल पर निर्भर है। वहीं, बाकी 15 फीसद लोग खुले कुओं या पानी के खुले स्त्रोतों से पेयजल प्राप्त करते हैं। भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड और यूरेनियम जैसे जानलेवा रसायन मिले हैं। इसके अलावा कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से स्थिति और गंभीर हो गई है। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने पाइप से जलापूर्ति को प्राथमिकता दी है।
सोलंकी ने कहा कि केंद्र ने पेयजल के लिए 2002-03 में 2000 करोड़ रुपये आवंटन किया था। वर्ष 2012-13 में इसे बढ़ाकर 10,500 करोड़ रुपये कर दिया है। सम्मेलन में राज्यों ने केंद्र पर अनदेखी के आरोप लगाए। ज्यादातर राज्यों ने आने वाले गर्मी के मौसम में पेयजल की किल्लत पर केंद्र का ध्यान खींचा।
