इसरो की बड़ी छलांग, अंतरिक्ष में भेजे सात उपग्रह

rocket-pslv20-successfully-puts-seven-satellites-in-orbit 2013-2-26

नई दिल्ली। इसरो ने अपने 101वें मिशन के तहत एक साथ सात उपग्रहों को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया है। इनमें से भारत-फ्रेंच संयुक्त उपक्रम के सरल उपग्रह के अलावा विभिन्न देशों के छह अन्य उपग्रहों को भी पीएसएलवी-सी 20 के जरिये कक्षा में भेजा गया है। इससे पहले भी एक साथ सबसे अधिक 10 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने का रिकॉर्ड भारत के ही नाम है। इसके अलावा रूस एकमात्र देश है, जिसने एक साथ आठ उपग्रह भेजने का कीर्तिमान बनाया है :

सरल : सरल मिशन भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो और फ्रांस की एजेंसी सीएनईएस का संयुक्त उपक्रम है। इसके माध्यम से अंतरिक्ष से सागर का अध्ययन किया जा सकेगा

-यह भारतीय लघु उपग्रह (आइएमएस) बस श्रृंखला-2 का पहला मिशन है। इस सीरीज में टेक्नोलॉजी के लघु रूपांतरण द्वारा 400 किग्रा तक के उपग्रह भेजे जा रहे हैं। यह मध्यम आकार के पेलोड ले जाने में भी सक्षम है।

उपयोग :

-सागर के मौसम विज्ञान और ऋतुओं की भविष्यवाणी की जा सकेगी।

-जलवायु और समुद्र तल के वृद्धि पर निगरानी रखेगा।

-सागरीय तापमान, धाराओं और लवणता का पर्यावरणीय आंकड़ा एकत्र करेगा।

-पशुओं के प्रवास (पक्षी, सील वगैरह) का अध्ययन।

-तैरती हुई चीजों और मछली पकड़ने वाली नौकाओं की लोकेशन पता चलेगी।

-सागर, पृथ्वी तंत्र और जलवायु पर शोध।

सफायर :

कनाडा का ऑप्टिकल सेंसर तंत्र है जो गहरे अंतरिक्ष में 6000-40,000 किमी तक की कक्षा में निगरानी कार्य के लिए भेजा गया है। कनाडा के इस मिशन का मकसद अमेरिका की अंतरिक्ष निगरानी नेटवर्क (एसएसएन) को सहयोग प्रदान करना है।

नियोस :

नियोस उपग्रह (नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट सर्विलांस सैटेलाइट) को भी कनाडा ने बनाया है। इसमें एक दूरबीन लगी है जो क्षुद्रगहों और भू-स्थानिक कक्षा के उपग्रहों की निगरानी के लिए है।

-एनएलएस 8.1 (यूनिब्राइट) और एनएलएस 8.2 (ब्राइट) : ऑस्ट्रिया के इन दोनों वैज्ञानिक उपग्रहों का मकसद तारों के तापीय अंतरों का अध्ययन करना है।

एनएलएस 8.3 (आउसैट 3)

डेनमार्क के छात्रों द्वारा तैयार किया गया उपग्रह है। इसका मकसद आर्कटिक क्षेत्र में जहाजी सिग्नलों को प्राप्त करना है।

एसट्रैंड-1 :

ब्रिटेन के नैनो सैटेलाइट विकास कार्यक्रम का हिस्सा है। पृथ्वी की निचली कक्षा में होने वाले बदलावों का अध्ययन करने के लिए इसको भेजा गया है।

पीएसएलवी :

पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) को इंडियन रिमोट सेंसिंग (आइआरएस) उपग्रह को प्रक्षेपित करने के लिए विकसित किया गया। उससे पहले इस तरह के प्रक्षेपणों के लिए रूस की मदद लेनी पड़ती थी। इसरो का यह 23वां पीएसएलवी मिशन है।

-अप्रैल, 2008 में एक साथ 10 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर इसने रूस द्वारा स्थापित विश्व रिकॉर्ड को तोड़ा

व्यावसायिक कार्यक्रम :

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम अब मुनाफे का सौदा भी होता जा रहा है। इसरो ने अब तक सभी 27 विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय जगत में भारतीय साख बढ़ने के साथ ही विदेशी अंतरिक्ष एजेंसियां भारत के साथ संयुक्त मिशन को अंजाम देने की इच्छुक हैं। मसलन भारत-फ्रांस के संयुक्त सहयोग से मेघ-ट्रॉपिक्स मिशन। विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित करने से व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी लाभ है

उपग्रह:

सरल

सफायर

नियोस

एनएलएस 8.1

एनएलएस 8.2

एनएलएस 8.3

एसट्रैंड-1

देश:

भारत-फ्रांस

कनाडा

कनाडा

ऑस्ट्रिया

ऑस्ट्रिया

डेनमार्क

ब्रिटेन

वजन:

409 किग्रा

148 किग्रा

74 किग्रा

14 किग्रा

14 किग्रा

3 किग्रा

6.5 किग्रा।

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