जम्मू । ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में दो दिन पहले हुए आत्मघाती हमला सिर्फ आतंकियों ने अपनी उपस्थिति का अहसास कराने के लिए नहीं किया था, बल्कि यह हमला अफजल गुरु की फांसी का बदला लेने के लिए भी था। सिर्फ यही नहीं, इस हमले में शामिल आतंकियों की मदद उत्तरी कश्मीर के एक सिख नागरिक ने भी की, जो पीएचई विभाग में एक दैनिक वेतन भोगी है।
आत्मघाती आतंकियों को गुलाम कश्मीर में लश्कर कमांडर फुरकान और हांजला ने भी ट्रेनिंग दी थी । मारे गए दोनों आत्मघाती और पकडे़ गए अबु तल्हा का संबंध लश्कर से ही था। अलबत्ता, उनके निशानों की रैकी करने वाले उनके गाइड का संबंध हिजबुल मुजाहिदीन से ही था। इस बीच, पुलिस ने अबु तल्हा के बाद आतंकियों के गाइड बशीर अहमद उर्फ हारुन के अलावा उनकी मदद करने वाले सिख नागरिक परनदीप सिंह को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। परनदीप सिंह बारामुला के पास कांसीपोरा का रहने वाला है। बशीर अहमद उर्फ हारुन उत्तरी कश्मीर में उडी सेक्टर के सलामाबाद इलाके का रहने वाला है। अबु तल्हा को गत रात को पुलिस ने बेमिना से पांच मिनट की दूरी पर स्थित रामपोरा-छत्ताबल से पकड़ा था और उसने ही बशीर का सुराग दिया था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बशीर भी बीते कई दिनों से श्रीनगर में ही रह रहा था। बशीर ने ही परनदीप सिंह के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि तल्हा व बशीर ने पूछताछ के दौरान बताया कि आत्मघाती हमलों की साजिश गत माह गुलाम कश्मीर में लश्कर के शीर्ष कमांडरों ने तैयार की थी। साजिश का खाका तैयार करने के बाद सीमा पार से आतंकी कमांडरों ने बशीर को कुछ ठिकानों की रैकी के लिए कहा ताकि अफजल गुरु की मौत का बदला लेने के लिए कुछ सनसनीखेज हमले किए जा सकें। उसने यह काम कर दिया। उसकी हरी झंडी मिलने के बाद सीमा पार बैठे आतंकी कमांडरों ने आत्मघाती आतंकियों के दस्ते को कश्मीर में लीपा घाटी जो उत्तरी कश्मीर में हंदवाडा के साथ जुड़ती है, के रास्ते भेजा। बशीर ने इन आतंकियों को उनके सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया। यह ठिकाना टंगमर्ग के पास था।
बेमिना में पुलिस पब्लिक स्कूल पर हमला करने से पूर्व 11 मार्च को आत्मघाती आतंकी दस्ते के सभी सदस्य बशीर और परनदीप से 11 मार्च को मिले। इसके बाद यह आत्मघाती हमले में मारे गए दोनों आतंकी और अबु तल्हा 13 मार्च की सुबह ही एक वाहन में बेमिना पहुंचे। वहां दो आत्मघाती आतंकियों को छोड़ने के बाद बशीर ने तल्हा को अपने छत्ताबल स्थित अपने चाचा के घर पहुंचाया जहां से वह पकड़ा गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तल्हा ने दावा किया है कि वह सिर्फ तीन आतंकी ही हमले के लिए आए थे। लेकिन हम अन्य दो आत्मघातियों का पता लगा रहे हैं, जिनके नाम छोटा हुरैरा व साद हैं। यह दोनों भी हमले के समय बेमिना के आस-पास ही थे और फिलहाल फरार हैं। उन्होंने बताया कि तल्हा का दावा है कि उसके दो साथी कश्मीर में घुसपैठ के कुछ दिन बाद ही पाकिस्तान लौट गए थे। लेकिन हमें उसके इस दावे का फिलहाल पूरा यकीन नहीं है।
गरीबी ने बनाया जेहादी जिंदा पकडे़ गए पाकिस्तानी आतंकी अबु तल्हा का असली नाम जुबैर है। इसके अलावा उसका कोड जरगर भी है। वह पाकिस्तान में 104, चक-मुल्तान का रहने वाला है। तल्हा के दो बहने और एक बड़ा भाई है। उसने बताया कि घर में आर्थिक तंगी के चलते उसने जेहादी बनने का फैसला किया। कश्मीर में दाखिल होने से पूर्व उसने लश्कर के कैंप में छह माह ट्रेनिंग ली थी। उसके कैंप कमांडर का नाम सैफ रहमान था जबकि हांजला और फुरकान उसके हैंडलर थे। इसके अलावा वह लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद के पुत्र तल्हा व दामाद वलीद से भी मिला था।
फुरकान कश्मीर में रहा है सक्रिय पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी तल्हा ने जिस फुरकान का नाम लिया है, वह लश्कर-ए-ताइबा के प्रमुख कमांडरों में एक है। वह वर्ष 2010 के अंत तक कश्मीर में सक्रिय रहा है। उसने वर्ष 2010 में हुए हिंसक प्रदर्शनों व पथराव में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
पूर्व आतंकी बशीर का चाचा है गुलाम कश्मीर में बेमिना आतंकी हमले के सिलसिले में पकडे़ गए गए बशीर अहमद का एक चाचा 1994 से ही गुलाम कश्मीर में रह रहा है। बशीर भी सक्रिय आतंकी रहा है और पकड़े जाने के बाद जब जेल से रिहा हुआ तो वह आतंकियों का ओवरग्राउंड वर्कर बन गया। उसने लश्कर कमांडरों के कहने पर कश्मीर में हमलों के लिए कई जगहों की रैकी की है। छत्ताबल में उसका एक चाचा गुलाम नबी रहता है और उसके मकान में ही उसने तल्हा को छोड़ा था। हालांकि पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन कुछ लोगों ने दावा किया है कि वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुखबिरी भी की है और हमले के बाद उसने खुद का बचाने के लिए तथाकथित तौर पर तल्हा के ठिकाने की जानकारी दी थी। बशीर कई बार गुलाम कश्मीर जा चुका है।
मारे गए आतंकियों की पहचान पुलिस के अनुसार, बेमिना में हमले करते हुए मारे गए आत्मघाती आतंकियों की पहचान पाकिस्तान में साहीवाल के रहने वाले हैदर और डेरा गाजी खान निवासी सैफ के रुप में हुई है। अलबत्ता, एक सूत्र ने मारे गए आत्मघातियों में एक अब्दुल्ला असकरी है।
दैनिक जागरण ने पहले ही दिन ही खुलासा कर दिया था कि बेमिना हत्याकांड की साजिश लश्कर ने तय की है और इस सिलसिले में 15 फरवरी को गुलाम कश्मीर की राजधानी में लश्कर कमांडरों ने बैठक की थी। इसमें अफजल गुरु की मौत के बाद पैदा हुए हालात के बीच सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देने और लश्कर के बजाय किसी और आतंकी संगठन द्वारा हमलों की जिम्मेदारी लेने का फैसला हुआ था।