नई दिल्ली। जज साहब, मुझ पर झूठा मामला बनाया गया है। मुझे जमानत दे दो। अगर मुझे जमानत नहीं मिली तो मैं तिहाड़ जेल में ही फांसी लगा लूंगा। रेप के आरोपी की जमानत अर्जी को जब अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश टीआर नवल ने खारिज कर दिया तो उसने आत्महत्या करने की बात कही। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह आरोपी को जेल ले जाने से पहले मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) ले जाए, जहां उसकी मानसिक जांच हो। इसके बाद ही आरोपी को तिहाड़ ले जाया जाए और जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाए।
हुआ यूं कि कल्याणपुरी थाना पुलिस ने एक युवती की शिकायत पर युवक राहुल के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था। राहुल ने अदालत में जमानत के लिए अर्जी दायर की थी। उसे अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए राहुल की अर्जी खारिज कर दी। इस पर राहुल ने अदालत के समक्ष कहा कि जज साहब, इन दिनों रेप के झूठे मुकदमों की बाढ़ आ गई है। इन्हीं में से एक मामला मेरा भी है। आपसी रंजिश के चलते युवती ने रेप के मामले में झूठा फंसाया है। अदालत ने कहा कि उसे जमानत नहीं मिल सकती। इस पर आरोपी आपा खो बैठा और चिल्लाते हुए कहा कि अगर उसे जमानत नहीं मिली तो वह तिहाड़ जेल में जाने के बाद फांसी लगा लेगा। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे चुप कराने व बाहर ले जाने की कोशिश की। लेकिन आरोपी के इस कथन को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने निर्देश जारी किया कि जेल ले जाने से पहले आरोपी की मानसिक स्थिति की जांच इहबास में कराई जाए।