प्रतापगढ़। बलीपुर के तिहरे हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआइ को शनिवार को बड़ी सफलता मिली। सीबीआइ ने शाम को बलीपुर चौराहे के निकट चोखेलाल की चाय की दुकान के पीछे पानी भरे गढ्डे से शहीद डीएसपी जिया उल हक की पिस्टल मैगजीन सहित बरामद कर ली। इधर, प्रधान नन्हे यादव की हत्या के मुख्य आरोपी कामता पाल और उसके बेटे अजय पाल ने शनिवार को कुंडा सीबीआइ कैंप कार्यालय में समर्पण कर दिया।
गौरतलब है कि इस मामले में इलाके के चर्चित विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया भी आरोपी हैं।
हथिगवां क्षेत्र के बलीपुर में प्रधान नन्हे यादव, उनके भाई सुरेश यादव व डीएसपी जियाउल हक की हत्या की जांच कर रही सीबीआइ टीम आठ मार्च से कुंडा में डेरा डाले है। सीबीआइ का जोर डीएसपी की लूटी पिस्टल की बरामदगी पर था। समझा जा रहा था कि पिस्टल मिलते ही असली कातिल का पता चल जाएगा। शुक्रवार को प्रधान के बेटे बबलू को हिरासत में लिए जाने के बाद यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि जल्द ही पिस्टल मिल जाएगी। पिस्टल में लगी मैगजीन में सभी दस कारतूस सुरक्षित मिले हैं। इसलिए अपनी ही पिस्टल से डीएसपी के मारे जाने का कयास खारिज हो गया है। जिस गढ्डे से पिस्टल बरामद हुई, उसी से 315 बोर के तीन कारतूसों के खोखे भी मिले हैं। घटना के बाद से प्रधान के हत्यारोपी कामता पाल, उसके बेटे अजय व विजय फरार चल रहे थे। सीबीआइ को फरार इन आरोपियों की सरगर्मी से तलाश थी। सीबीआइ के बढ़ते दबाव के बीच शनिवार को सुबह साढ़े दस बजे कामता पाल बेटे अजय पाल के साथ कुंडा स्थित सीबीआइ के कैंप कार्यालय पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। सीबीआइ के अधिकारी उनसे पूछताछ में जुट गई है।
इसी के साथ सीएमओ दफ्तर में डीएसपी के शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉ.अनिरुद्ध सिंह, डॉ.अरविंद वर्मा और डॉ.संजय शर्मा से शनिवार को फिर से पूछताछ की गई। राजा भैया की बेंती कोठी में काम करने वाले दो कर्मचारियों से भी सीबीआइ ने पूछताछ की है। दोनों कर्मचारी बलीपुर के रहने वाले बताए जाते हैं।