मुंबई। अल्लाह न जाने कितने हाथों से जिंदगी की स्टेयरिंग को मोड़ता है। चार साल की इकरा खान पर उसने किस तरह रहमत बरसाई, यह देखिए। मासूम बच्ची महानगर की उसी बिल्डिंग में ट्यूशन पड़ने गयी थी, जिसमें दबकर 48 लोग मर गए लेकिन इकरा को बहाना देकर सुरक्षित निकाल लिया। हां, इससे इतना जरूर हुआ कि ट्यूशन न पढ़ने पर मम्मी ने प्यारी बेबी को खूब डांटा था। यह भी कह दिया कि वह झूठ बोल रही है और ट्यूशन क्लास बंक करके आई है।
थाणे के महापे रोड पर मबले में बदली सात मंजिला इमारत में पड़ौस की इकरा हर रोज ट्यूशन पढ़ने जाती थी। गुरुवार को भी वह शाम पांच बजे घर से निकली। कुछ देर बाद प्ले ग्रुप की छात्रा इकरा घर लौट आई। मंमी ने वजह पूछी तो, उसने कहा कि टीचर नहीं है। इस पर छोटी बच्ची को जमकर डांट पड़ी। परंतु कुछ देर बाद ही जोर का धमाका हुआ तो इकरा और उसकी मां ने देखा कि वह बिल्डिंग मलबे में बदल गयी है, जिसमें इकरा ट्यूशन गयी थी। यह देखकर मां का दिल तो हिल गया, उसने दौड़कर बेटी को गले से लगा लिया।
इकरा के 27 वर्षीय पिता नूरुद्दीन खान हादसे के बारे में बताते हुए भावविह्वल हो जाते हैं। वह बेटी की तस्वीर दिखाते हुए बताते हैं कि इमारत ध्वस्त होने के बाद से वह सदमे में है। उसके मुंह से एक बोल तक नहीं फूटा है। इकरा से बात करने की हमने भी बहुत कोशिश की लेकिन उसकी खामोशी नहीं टूटी।
वैसे दुर्घटना के समय इकरा के पिता नूरुद्दीन अपना ऑटो लेकर निकले हुए थे। मां अंजुम कहती हैं, अल्लाह ने रहमत बरसाई है। पति-पत्नी दोनों मिलकर उसका शुक्रगुजार करने लगते हैं। दोबारा कहते हैं, कि खुदा ने ही उसे ट्यूशन से वापस घर भेज दिया। वह बताते हैं कि इकरा के साथ लगभग 20 और बच्चे पढ़ते थे लेकिन उन मासूमों के मां-बाप इतने सौभाग्यशाली नहीं रहे। मलबे में कई बच्चे तो अभी भी दबे हुए हैं।
पत्नी और बेटी के सदमे में देख रहे नूरुद्दीन को पता चला है कि इलाके की बहुत सी इमारतों के निर्माण में सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया है। इसलिए उन्होंने घर बदलने का फैसला किया है। अब भांडुप इलाके में रहने की जगह का इंतजाम किया है।
परिवार के एक अन्य सदस्य बताते हैं कि नूरुद्दीन की बेटी तो बच गयी लेकिन इसके बावजूद वह हादसे में हुए शोक से बच नहीं सके हैं। उनके बड़े भाई का परिवार ध्वस्त बिल्डिंग की छठी मंजिल पर रहता था। इमारत गिरी तो पत्नी सीमा खान, दो बेटियां और बेटे मलबे में दब गए। शुक्रवार तक इनमें से सीमा, 10 साल की बेटी और छह साल के बेटे का शव बाहर निकाल लिया गया था। एक बेटी को राहतकर्मी नहीं तलाश सके।