कानपुर। अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाने वाले गोताखोरों को दो वक्त की रोटी के लाले पड़ रहे हैं। उन्हें पांच माह बाद भी मानदेय नहीं मिल सका है। इन्हें गंगा में डूबने वालों को बचाने के लिये पिछले साल नवंबर माह में मानदेय दिलाने का आश्वासन दिया था।
पिछले दस सालों से गंगा बैराज पर ्रगोताखोर मो.निसार, रामबाबू, जलील, फिरोज, सबीर, शमी हसन, देवेंद्र और कौशल सहित आठ लोग गंगा में डूबने वाले सैकड़ों लोगों की जान बचा चुके हैं। मकर संक्रान्ति, कार्तिक पूर्णिमा, सोमवती अमावस्या सहित प्रमुख गंगा स्नान पर्वो पर भी यह लोगों को बचाने के लिये गंगा तट पर मौजूद रहते हैं।
इसके बावजूद प्रशासन की ओर से उन्हें अब तक किसी प्रकार की मदद नहीं मिली है। पिछले साल नवंबर में एसीएम पांच एसके मिश्र ने सभी आठ गोताखोरों को मानदेय दिलाने का आश्वासन देते हुए नगर आयुक्त को पत्र लिखा था। पांच माह बीतने के बाद भी उन्हें अब तक मानदेय नहीं मिला है। आय का कोई अन्य स्त्रोत न होने से उनके आगे दो वक्त की रोटी का भी संकट हो गया है। गोताखोरों के प्रमुख मो.निसार ने बताया कि एसीएम पांच के आश्र्वासन के बाद से उन्होंने इस साल कटरी में की जाने वाली सब्जी की फसल नहीं की उन सभी को उम्मीद थी कि उन्हें मानदेय मिलेगा पर ऐसा हुआ नहीं।
होली पर उन्होंने गंगा बैराज में नहाने आये छह लोगों को उन्होंने गंगा में डूबने से बचाया था और पांच युवकों के शवों को बाहर निकाला था। रामबाबू ने बताया कि हजारों रुपये का कर्ज लेकर उन्होंने नावें खरीदी हैं लेकिन उनसे भी कोई आय नहीं होती है क्योंकि गंगा बैराज पर तो पुल बना ही है कोई पार जाने के लिये नावों में नहीं बैठता है। गंगा स्नान पर्व पर या कभी कभार ही कुछ लोग नौका विहार कर लेते हैं जिससे कुछ पैसा मिल जाता है।