नई दिल्ली। भाजपा किसी भी दबाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम को खारिज नहीं करेगी। हालांकि इस मुद्दे पर वह सहयोगी दल जदयू को मनाने की कोशिश अवश्य करेगी।
13-14 अप्रैल को जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके सहयोगियों द्वारा आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम स्पष्ट किए जाने को लेकर प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में राजग की एकजुटता खतरे में पड़ सकती है। मालूम हो कि जदयू मांग करती रही है कि पीएम पद के लिए वैसे व्यक्ति को ही नामित किया जाए जिसकी छवि धर्मनिरपेक्ष हो और वह सबको साथ लेकर चलने वाला हो। वहीं भाजपा का मानना है कि पीएम पद के उम्मीदवार के नाम की तत्काल घोषणा न की जाए।
भाजपा ने गुरुवार को संकेत दिए हैं कि जदयू नीतीश कुमार के उस रुख का समर्थन कर सकती है जिसमें कहा गया है कि प्रमुख विपक्षी पार्टी को बिना किसी देरी के अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित करना चाहिए। पार्टी सूत्रों ने बताया कि राजग की एकता को बनाए रखने के लिए भाजपा गठबंधन के सहयोगियों की एक बैठक बुला सकती है। सूत्रों ने आशा व्यक्त की कि जदयू इस मुद्दे पर हड़बड़ी कोई फैसला नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी पिछले चुनाव में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल की तरह अपने प्रमुख सहयोगी जदयू नहीं खोना चाहती है। सूत्रों ने कहा कि भाजपा नेतृत्व मोदी के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में उभरने और उससे उपजे ‘बाहरी दबाव’ को अपने ऊपर हावी होने नहीं देगी इसलिए वह फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि सहयोगी को साथ बनाए रखने और चुनाव बाद नए सहयोगी को अपने पाले में लाने के लिए नेता के नाम का एलान न करना ज्यादा ठीक है। लेकिन वे ऐसा भी दिखाना चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी चुनाव में पार्टी का चेहरा हैं।
सूत्रों के अनुसार पार्टी ऐसा मानकर चल रही है कि जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पीएम पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा संबंधी प्रस्ताव पास तो होगा लेकिन अंतिम निर्णय नीतीश कुमार पर छोड़ा जाएगा।