मुंबई। सूखे को लेकर विवादस्पद टिप्पणी करने के बाद विपक्ष के निशाने पर आए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार रविवार को पश्चाताप स्वरूप उपवास पर बैठ गए हैं। वहीं, विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।
सांगली जिले के कराड़ में महाराष्ट्र के नेता यशवंत राव चह्वाण की समाधि के पास एक दिन के उपवास पर बैठे अजित पवार ने कहा कि ये मेरी राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी गलतियों में एक है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने अपने भतीजे और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बचाव करते हुए विपक्ष से इस मामले का पटाक्षेप करने को कहा था। उन्होंने शनिवार को नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कहा था अजित की सूखा प्रभावित इलाकों पर टिप्पणी असंगत थी और जब उन्होंने इस पर अफसोस जाहिर कर दिया है तो उन्हें माफ कर देना चाहिए।
राकांपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर मैं कहना चाहूंगा कि अजित पवार का बयान असंगत और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें अपनी हैसियत का ध्यान रखते हुए अत्यंत सावधान रहना चाहिए। जब उन्होंने अफसोस जाहिर किया है तो उन्हें माफ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की जिम्मेदारी वाले पद पर वे बने हुए हैं वहां रहते हुए उन्हें अपने शब्दों और भाषा का इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि अजित पवार पिछले हफ्ते उस समय आपा खो बैठे थे जब उनसे राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों में चल रहे प्रदर्शन पर बयान की मांग की गई थी। बयान मांगे जाने पर अजित ने सवाल किया था, कौन हैं ये भाईसाहेब देशमुख? उनके प्रदर्शन का आधार क्या है? क्या इससे पानी पैदा हो जाएगा? जब पानी ही नहीं है तो कहां से मैं पानी का प्रबंध करूंगा? अब बांधों में क्या मैं मूत्रत्याग करूं?
उपमुख्यमंत्री की इस तल्ख टिप्पणी के खिलाफ समूचे महाराष्ट्र में प्रदर्शन हुए थे। अजित पवार ने अपनी टिप्पणी के लिए क्षमा भी मांगी, लेकिन विपक्ष माफी देने से इनकार करते हुए उनके इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है।