यूपी में कानून व्यवस्था खस्ताहाल: मायावती

mayawatiलखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बसपा सुप्रीमो मायावती रविवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर प्रदेश सरकार पर जमकर बरसीं। उनके मुख्य निशाने पर थी प्रदेश की खस्ता कानून-व्यवस्था और उन्होंने केंद्र सरकार को भी नहीं बख्शा।

रमाबाई अंबेडकर मैदान पर रैली में मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था बेहद खराब है और चारों ओर गुंडों तथा माफिया का राज है। पुलिस भी कुछ करने में नाकाम है। माता-बहन व बेटियां तक सुरक्षित नहीं हैं। प्रदेश में पीड़ितों को ही जेल में बंद कर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बुलंदशहर में जिस बच्ची के साथ रेप हुआ, पुलिस ने उसको ही जेल में डाल दिया।

सुप्रीम कोर्ट के मामला संज्ञान में लेने के बाद उसको न्याय मिला। अभी प्रदेश में कानून का राज नहीं चल रहा है। प्रदेश सरकार की नीतियां सही नहीं हैं, विकास कार्य ठप हैं और जनता बेहाल।

उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टियों खासतौर पर बसपा के साथ बदले की भावना से काम किया जा रहा है। जिसका ताजा उदाहरण कल यहां से हटाए गए बैनर, पोस्टर व होर्डिग्स हैं। अनुमति के बावजूद यह ओछी हरकत की गई। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जो लोग सपा के दबाव में बसपा के साथ दु‌र्व्यवहार कर रहे हैं उन पर नजर रखी जा रही है। सत्ता में आने पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाटपार रानी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उसने सपा की जीत सुनिश्चित कराने में मदद की थी। हंडिया सीट पर भी उपचुनाव होना है। अधिकारियों ने दोबारा गड़बड़ी की तो बसपा सत्ता में आने पर इसकी जांच कराएगी।

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि दबे-कुचले लोगों और अल्पसंख्यकों को यदि कानूनी अधिकार का फायदा लेना है तो सत्ता में आना होगा। उत्तर प्रदेश में बसपा की सत्ता के दौरान इसे देखा भी गया है। राजनीतिक सत्ता की मास्टर की जब तक अपने हाथ में नहीं आएगी तब तक पिछड़े तबके पर जुल्म, ज्यादती नहीं रुकेगी। मायावती ने कहा कि उन्होंने अपने चारों मुख्यमंत्रित्वकाल में सर्वसमाज को ध्यान में रखा, लेकिन प्राथमिकता पिछड़ों और गरीबों को दी। उन्होंने कहा कि कठिन से कठिन समय में भी उन्होंने उत्तर प्रदेश को सांप्रदायिक तनाव से बचाया, लेकिन सपा सरकार के कार्यकाल में यह राच्य दंगा प्रदेश में तब्दील हो गया है। उन्होंने दोहराया कि 30 सितंबर 2010 को अयोध्या मामले का इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ की विशेष पीठ से फैसला आना था। पूरा देश दहशत में था, लेकिन उत्तर प्रदेश में स्कूल, कॉलेज व दफ्तर बंद किए बगैर पूरी तरह शांति बनाए रखी गई। केंद्र सरकार ने मांगने के बावजूद केंद्रीय सुरक्षाबल नहीं उपलब्ध कराई थी।

मायावती ने कहा कि दलितों और पिछड़ों के आदर्श संतों, गुरुओं के स्मारकों व संग्रहालयों का ठीक से रखरखाव नहीं किया जा रहा है। उन्होंने महंगाई के लिए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन छीनकर धन्नासेठों को दी जा रही है। केंद्र सरकार वायदा खिलाफी कर रही है। पूरे देश से दलित व आदिवासी जमीन की वापसी की मांग लेकर फिर से दिल्ली जा रहे हैं। केंद्र की नीयत साफ नहीं है। उत्तर प्रदेश में भी दलितों व पिछड़ों को आंवटित जमीन पर दंबग कब्जा कर रहे हैं।

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि उनकी सरकार आने पर दलितों की जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों को ऐसा तोड़ा जाएगा कि वे ऐसी हरकत कभी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर व कांशीराम के सपनों को पूरा करने के लिए दलितों, पिछड़ों को एकजुट होना ही होगा। उन्होंने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

रैली में मायावती ने केंद्र सरकार को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसान, दलित, पिछड़े व आदिवासियों के साथ अन्याय कर रही है। उसने सभी भूमिहीनों को जमीन मुहैया न करा कर वादाखिलाफी की है। मायावती ने कहा कि हमने अपने शासनकाल में सभी भूमिहीनों को उत्तर प्रदेश में जमीन देकर उनको अपने पैरों पर खड़ा होने लायक बनाया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने सर्वसमाज के उत्थान पर ध्यान दिया जबकि अब न तो राच्य में ऐसा हो रहा और न ही केंद्र सरकार ऐसी किसी योजना पर काम कर रही है।

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