विदेशियों के बीच बेहद लोकप्रिय रही है जर्मन बेकरी

jarmny bakaryनई दिल्ली। विदेशी सैलानियों के बीच बेहद लोकप्रिय जर्मन बेकरी की स्थापना जर्मन नागरिक वूडी गुटजेट ने 1988 में की थी। पुणे के ओशो आश्रम और छबाद हाउस के पास स्थित इस बेकरी को वूडी ने 1996 में स्वास्थ्य कारणों से ध्यानेश्वर खरोसे को सौंप दिया था। रेस्तरां के मालिक खरोसे की मौत हो चुकी है और अभी यह बेकरी उनकी पत्नी स्मिता चला रही है।

13 फरवरी 2010 को यहां हुए विस्फोट में 17 लोगों की मौत हो गई थी और 64 अन्य घायल हो गए थे। इसमें चार विदेशी नागरिक शामिल थे। सोमवार को इस मामले में सत्र न्यायालय का फैसला आ सकता है।

जांच अधिकारी ने 2,500 पन्नों की रिपोर्ट में सात लोगों को आरोपी बनाया है जिनमें एक हिमायत बेग और दूसरा बिलाल बेग है। जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रखते हुए कोर्ट ने फैसले के लिए आज की तारीख मुकर्रर की है।

इस पूरे मामले की जांच में सामने आया है कि धमाके को अंजाम देने का मुख्य आरोपी हिमायत बेग है। इसने इंडियन मुजाहिदीन का सरगना यासिन भटकल के साथ मिलकर पूरी साजिश रची थी। गौर हो कि अमेरिका की गिरफ्त में आए लश्कर-ए-तैयबा आतंकी डेविड कोलमन हेडली ने जर्मन बेकरी की रेकी की थी। धमाके का मकसद ज्यादा से ज्यादा विदेशी सैलानियों को हताहत करना था। धमाके में आरडीएक्स, अमोनियम नाइट्रेट, पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन ऑयल, बॉल बेयरिंग और आइडीडी का इस्तेमाल किया गया था। धमाके का सारा साजोसामान मुंबई के कमिश्नर ऑफिस के सामने स्थित क्रॉफर्ड मार्केट से खरीदा गया था। पुणे के उदगीर में बेग ने भटकल की मदद से बम तैयार किया था। जर्मन बेकरी में बम भटकल ने रखा था और बेग बेकरी के बाहर निगरानी कर रहा था।

मामले की जांच कर रही एटीएस को पहली कामयाबी 7 सितंबर 2010 को मिली जब उसने धमाके के मास्टरमाइंड हिमायत बेग को गिरफ्तार किया। इसके बाद नासिक से शेख लालबाबा मुहम्मद हुसैन उर्फ बिलाल बेग को गिरफ्तार किया। बिलाल पर हिमायत की मदद करने का आरोप है। 22 नंवबर 2011 को दिल्ली की स्पेशल सेल ने धमाके के एक और आरोपी कतील सिद्दकी को गिरफ्तार किया। हालांकि पुणे की यरवडा जेल में दो कैदियों ने उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने चार आरोपियों को फरार बताए हैं। इनके नाम हैं-यासीन भटकल, मोहसिन चौधरी, रियाज भटकल और फैयाद कागजी।

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