गाजियाबाद। आरुषि-हेमराज हत्याकांड में गुरुवार को सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एस. लाल की अदालत में एएसपी सीबीआइ एजीएल कौल ने कहा कि उन्होंने आरुषि के मोबाइल फोन व गोल्फ स्टिक की शिनाख्त किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं कराई थी। जब तक उन्हें विवेचना मिली, तब तक अपराध का परिदृश्य बदल चुका था और मकान में परिवर्तन किया जा चुका था।
अदालत ने जिरह स्थगित करते हुए अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल की तारीख तय कर दी। जिरह के दौरान कौल ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर व मनोज सिसौदिया से जिरह के दौरान कहा कि कार्रवाई की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। मैंने गोल्फ स्टिक व उनके बैग के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की। अंतिम रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया था कि विशेषज्ञ की रिपोर्ट की जांच के बाद पाया कि गोल्फ स्टिक नंबर 3 व 5 को पूरी तरह से साफ किया गया, जिससे दोनों अन्य स्टिक से अलग दिख रही थीं।
कौल ने कहा कि आरुषि के मोबाइल फोन की पहचान किसी न्यायिक या अन्य मजिस्ट्रेट से नहीं कराई। 15/16 मई 2008 के बाद उसके मोबाइल से की गई कॉल का विवरण टेलीफोन कंपनी से प्राप्त नहीं किया था और न ही रिकार्ड पत्रावली में है। आरुषि के मोबाइल फोन की शिनाख्त कार्रवाई कुसुम या मुल्जिमान से किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष नहीं कराई गई। इस मोबाइल फोन का जो डिब्बा उन्हें दिया गया था, उस पर आइएमईआइ नंबर अंकित था। विशेषज्ञों से मिले मोबाइल सेट पर अंकित आइएमईआइ नंबर का मिलान डिब्बे पर मिले आइएमईआइ नंबर से कर लिया गया था। दोनों के नंबर एक ही पाए गए थे।