मुंबई । करीब तीन साल पहले पुणे की जर्मन बेकरी में विस्फोट करवाने वाले इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी मिर्जा हिमायत बेग को स्थानीय अदालत ने गुरुवार को फांसी की सजा सुनाई गई है। सोमवार को पुणे के सत्रन्यायाधीश एनपी धोते ने बेग को इस मामले में दोषी करार दिया था। फैसले के बाद कोर्ट परिसर के बाहर कुछ सामाजिक संगठनों ने पटाखे फोड़कर न्यायिक प्रणाली की आलोचना की। 13 फरवरी, 2010 में हुए इस शक्तिशाली विस्फोट में 17 लोग मारे गए थे और 65 घायल हुए थे।
सजा सुनाने से पहले हुई दोनों पक्षों की जिरह के बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलील से सहमति जताई है। कोर्ट ने माना है कि जर्मन बेकरी में विस्फोट की साजिश जानमाल का भारी नुकसान पहुंचाकर लोगों में दहशत फैलाने के उद्देश्य से रची गई थी। इसका मकसद लोगों में चुनी हुई सरकार के प्रति अविश्वास पैदा करना एवं कानून व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना था। मरने वालों में पांच विदेशी नागरिक भी थे।
हिमायत बेग को हत्या सहित 17 आरोपों में 14 में दोषी पाए जाने के बाद मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। भारत में इंडियन मुजाहिदीन करीब एक दशक से अलग-अलग शहरों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता आ रहा है। लेकिन उसके किसी सदस्य को पहली बार इतनी बड़ी सजा सुनाई गई है।
फैसले पर जज ने जब बेग से प्रतिक्रिया पूछी तो वह फफक पड़ा। उसने अपने आपको निर्दोष बताया और कहा कि राकेश मारिया के नेतृत्व में महाराष्ट्र एटीएस ने उसे इस मामले में फर्जी तरीके से फंसाया है। जर्मन बेकरी विस्फोट से उसका कुछ लेना-देना नहीं है। पुलिस असली अपराधियों को पकड़ने में नाकाम रही, इसलिए उसे बलि का बकरी बनाया गया। बचाव पक्ष में कम उम्र (33 वर्ष) का हवाला देते हुए सजा में रहम की गुहार लगाई तो अभियोजन पक्ष ने कहा कि कसाब और याकूब मेनन को कम उम्र के बावजूद फांसी की सजा सुनाई गई है।
जर्मन बेकरी विस्फोट कांड में महाराष्ट्र के बीड जिले के निवासी हिमायत बेग के अलावा एक और शख्स वकील सिद्दीकी को भी गिरफ्तार किया गया था। लेकिन पिछले साल कुछ लोगों ने यरवदा जेल में ही उसकी हत्या कर दी थी। इस विस्फोट की योजना इंडियन मुजाहिदीन के प्रमुख सदस्य यासीन भटकल और फैयाज ने हिमायत बेग के साथ मिलकर श्रीलंका के कोलंबो शहर में बनाई थी।
यासीन एवं फैयाज सहित इंडियन मुजाहिदीन के चार अन्य सदस्यों जैबुद्दीन अंसारी उर्फ अबू जुंदाल, इकबाल भटकल, रियाज भटकल एवं मोहसिन चौधरी के विरुद्ध भी इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। लेकिन अबू जुंदाल को छोड़कर बाकी सब अभी तक फरार हैं।