नई दिल्ली। पांच साल की बच्ची से रेप पर मचे बवाल के बाद गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे भले ही दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दे रहे हों, लेकिन अपने अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में गृह मंत्रालय का रिकार्ड बेहद खराब है। दिसंबर में राजधानी में हुए गैंगरेप के मामले में भी अभी तक किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।
ले-देकर गृह मंत्रालय ने एक माह पहले दिल्ली पुलिस के चार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। हालत यह है कि अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए गठित वीणा कुमारी मीणा और जस्टिस उषा मेहरा समितियों की रिपोर्ट को भी फाइलों में बंद कर दिया गया।
गत 16 दिसंबर को गैंगरेप के बाद मचे बवाल के बाद शिंदे ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए जस्टिस उषा मेहरा समिति का गठन किया था। पीड़ित लड़की के दोस्त के आरोपों की जांच के लिए गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव वीणा कुमारी मीणा को अलग से जांच का जिम्मा सौंपा गया था। मीणा ने 16 जनवरी और जस्टिस मेहरा ने 23 फरवरी को अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप दी थी। लेकिन, इन रिपोर्टो को सार्वजनिक करना तो दूर इनके बारे में बात तक करने के लिए गृह मंत्रालय के अधिकारी तैयार नहीं हैं।
सूत्रों के मुताबिक मेहरा समिति ने गैंगरेप मामले में दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग की नाकामियों का विस्तार से जिक्र किया है। यही नहीं, इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के नाम भी गिनाए गए थे। लेकिन, दो महीने बीतने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। गत 19 मार्च को दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त दीपक मिश्रा, संयुक्त आयुक्त (ट्रैफिक) सत्येंद्र गर्ग, डीसीपी (ट्रैफिक) प्रेम नाथ और एडिशनल डीसीपी (पीसीआर) सत्यवीर कटारा को कारण बताओ नोटिस जरूर जारी किया गया था।
लेकिन, इस नोटिस पर हुई कार्रवाई पर गृह मंत्रालय के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। गैंगरेप की घटना के बाद गृह सचिव आरके सिंह ने राजधानी की सुरक्षा की कमान अपने हाथ में लेते हुए एक कमेटी बनाई थी। इसमें पुलिस और परिवहन विभाग समेत कई महकमों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए थे। इस कमेटी की बैठक महीने में दो बार होनी थी, जिसमें सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा के साथ आगे की कार्रवाई के फैसले लिए जाते। लेकिन, दो-तीन बैठकों के बाद ही यह कमेटी भी खानापूर्ति बनकर रह गई।