बिल्हौर। तहसील कर्मियों की मिलीभगत से कुछ लोगों ने एक किसान को अभिलेखों में मृत दिखाकर उसकी अठारह बीघा खेतिहर भूमि अपने नाम दर्ज करा ली है। पीड़ित जब बेटों के साथ इस धोखाधड़ी के खिलाफ इंसाफ मांगने पहुंचा तो अधिकारियों ने मामले की जांच कराने या कार्रवाई के बजाय खुद को जीवित साबित करने के लिए पीड़ित को मुकदमा दर्ज कराने की सलाह दे डाली।
बिल्हौर तहसील के नदीहा बुजुर्ग गांव निवासी मो. इस्लाम व मो. सुलेमान सगे भाई हैं। दोनों के तीन-तीन पुत्र हैं। इस्लाम ने बताया कि सुलेमान की मौत हो चुकी है और उसके हिस्से की भूमि उसके तीनों पुत्रों के नाम हो चुकी है। अपने हिस्से की 18 बीघा जमीन पर वह तीनों पुत्रों इमरान, रब्बानी व मुस्तकीम के साथ खेती करता है।
पिछले माह बैंक से क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए वह तहसील से अपनी जमीन की खतौनी लेने पहुंचा,जो नहीं मिली। इस पर वह घर से पुरानी खतौनी लेकर आया। तहसील में मामले की जांच कराई तो पता चला कि अभिलेखों में उसकी मौत दो वर्ष पूर्व हो चुकी है और जमीन को उसके वारिसों के नाम पर दर्ज कर दी गई है। जब उसने खतौनी में अपने वारिसों के नाम देखे तो होश उड़ गए। बेटों के स्थान पर गांव के ही बाबू सत्तार, बाबू नवाब और मुहम्मद शब्बीर के नाम वारिसों के रूप में लिखे थे। इस धोखाधड़ी के खिलाफ इस्लाम अपने तीनों बेटों को साथ लेकर तहसीलदार, एसडीएम समेत आला अधिकारियों की चौखट पर न्याय मांगने पहुंचा।
लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस धांधली की जांच कराने और दोषी तहसील कर्मियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई तो नहीं की, बल्कि मोहम्मद इस्लाम को खुद को जीवित साबित करने के लिए मुकदमा कायम करने की सलाह दे डाली। मजबूरन इस्लाम अपने को जीवित साबित कर जमीन वापस पाने के लिए मुकदमे का सहारा लेने को मजबूर हो गया। तहसीलदार अनिल कुमार ने बताया उन्हें मामले की जानकारी नहीं है इस बारे में जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी।