देहरादून, [जाब्यू]। उत्तराखंड के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चारों ओर पसरे मलबे व लाशों से संक्रामक बीमारियां और उनके चलते महामारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है। इस संभावित खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमे ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आपदाग्रस्त इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर व चूना पाउडर छिड़कने के साथ ही फॉगिंग के भी इंतजाम तेज कर दिए गए हैं। संक्रमण पर निगरानी को एपिडिमियोलॉजिस्ट की विशेष टीम व रैपिड रिस्पांस टीमें गठित की गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से एहतियाती कदम उठाते हुए अब तक 19600 किग्रा ब्लीचिंग पाउडर व 10500 किग्रा चूना पाउडर प्रभावित जिलों में छिड़काव के लिए भेजा जा चुका है। पानी में संक्रमण दूर करने को चार लाख क्लोरीन गोलियां वितरित की जा चुकी हैं, जबकि दस लाख अतिरिक्त क्लोरीन गोलियों की डिमांड केंद्र को भेजी गई है। केंद्र सरकार ने भी संभावित रोगों की निगरानी के लिए पांच सदस्यीय ऐपिडिमियोलॉजिस्ट की टीम भेजी है, जिसे हवाई मार्ग से आज रूद्रप्रयाग भेजा गया।
प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में भी डायरिया, मलेरिया जैसी बीमारियों के इलाज की ठोस व्यवस्था व दवाएं जुटाई गई हैं। आपदा पीड़ितों के उपचार के लिए 313 डाक्टर व 4977 पैरामेडिकल स्टाफ तैनात किया गया है। मंगलवार को फोर्टिस, दिल्ली के 11 चिकित्सकों का दल भी रुद्रप्रयाग, सोनप्रयाग व बदरीनाथ भेजा गया।
आज पहुंचेगी स्वास्थ्य मंत्रालय की शीर्ष टीम
नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। उत्तराखंड में आई आपदा के बाद यहां महामारी की आशंका के आकलन के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने शीर्ष अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजने का फैसला किया है। यह टीम बुधवार को वहां पहुंच कर स्थिति का आकलन करेगी। साथ ही मंत्रालय ने कहा है कि डॉक्टरों की आठ और टीमें तैयार हैं। राज्य के कहते ही इन्हें वहां भेजा जा सकता है।
केंद्र से जाने वाले शीर्ष दल में ‘राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र’ (एनसीडीसी) के निदेशक डॉक्टर एलएस चौहान शामिल हैं। उनके अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय के ‘आपातकालीन चिकित्सा राहत’ (ईएमआर) के निदेशक पी. रविंद्रन और ‘राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ (एनवीबीडीसीपी) के संयुक्त निदेशक डॉ. केएस गिल शामिल हैं। किसी भी तरह की महामारी के आकलन और उसकी प्रयोगशाला जांच आदि के लिहाज से एनसीडीसी देश का शीर्ष संस्थान है। इसी तरह मंत्रालय की ओर से ऐसी आपदा के समय समन्वय की जिम्मेदारी ईएमआर डिवीजन के पास होती है। मच्छरों और दूसरे संवाहकों के जरिये होने वाली बीमारियों के नियंत्रण का काम एनवीबीडीसीपी के पास होता है। इससे पहले महामारी संबंधी सहायता के लिए तीन महामारी विशेषज्ञ और तीन सूक्ष्म जीव वैज्ञानिकों को भेजा जा चुका है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा है कि उसने डॉक्टरों की आठ टीमें तैयार कर ली हैं। राज्य की ओर से जरूरत बताते ही उन्हें रवाना किया जा सकता है। इससे पहले छह विशेषज्ञ डॉक्टर वहां भेजे जा चुके हैं। हालांकि सहायता पहुंचाने के मामले में मंत्रालय बहुत देरी से जागा है। रविवार को डॉक्टरों की पहली टीम वहां पहुंची, जब एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका था।