शरीफ के इरादों पर जमीनी अमल का इंतजार

manmohanनई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले के बावजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बड़ा दिल दिखाते हुए पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से बातचीत को तैयार हैं। हालांकि, अरसे बाद 29 सितंबर को न्यूयॉर्क में होने वाली दोनों प्रधानमंत्रियों की इस मुलाकात में किसी बड़े नतीजे की उम्मीद धुंधली है। वैसे भी सत्ता में शरीफ की पहली तिमाही ने बता दिया है कि चुनाव के दौरान किए संबंध सुधार के वादों पर अमल का रास्ता उनके लिए आसान नहीं है।

जून में शरीफ के सत्ता संभालने के बाद पाकिस्तानी सेना की ओर से संघर्षविराम उल्लंघन का सिलसिला जारी है। जुलाई में भारत की हद में पांच भारतीय सैनिकों की हत्या से लेकर घाटी में आतंकी घुसपैठ का ग्राफ ऐसे वक्त बढ़ा है जब पाकिस्तान में रक्षा मंत्रालय की कमान सीधे शरीफ के ही हाथ में है। इस दौरान शरीफ और उनकी सरकार से सधी प्रतिक्रियाएं देने की कोशिश जरूर हुई है, लेकिन जमीनी स्थिति में खास बदलाव नहीं हुआ है। गौरतलब है कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने भारत के साथ संबंध सुधार को प्राथमिकता करार दिया था। साथ ही मुंबई आतंकी हमले के गुनाहगारों को सजा दिलाने का भी वादा किया था। हालांकि, जमीनी स्तर पर भारत की ओर से साजिशकर्ताओं को सजा दिलाने की कवायद सुस्त रफ्तार से चल रही है। वहीं, हाफिज सईद जैसे आतंकी मास्टरमाइंड अब भी भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। गुलाम कश्मीर के आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में भी आतंकवाद की खेती जारी है।

पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा कहते हैं कि बीते सौ दिन में पाकिस्तान की सत्ता पर नवाज के नियंत्रण की सीमाएं नजर आ गई हैं। ऐसे में सवाल है कि भारत सरकार जनमत के विपरीत शरीफ से बातचीत के लिए इतनी उतावली में क्यों हैं। इस साल जम्मू-कश्मीर में आतंकी हिंसा की घटनाओं में खासी बढ़ोतरी हुई है, जिनमें सेना और सुरक्षाबलों को भी निशाना बनाया जा रहा है। वैसे प्रधानमंत्रियों की मुलाकात से पहले विदेश मंत्रालय कह चुका है कि भारत को मुंबई आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई का इंतजार है।

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