अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग तेईस

श्री गजानन महतपुरकर
यह नाम नई पीढ़ी के पत्रकारों, लेखकों, साहित्यकारों, कवियों व राजनीतिज्ञों के लिए नया हो सकता है। वजह ये कि सन् 1989 में ही अजमेर शहर से प्रस्थान कर लिया था। लेकिन इससे पहले के जागरूक लोगों के लिए यह शख्स भलीभांति सुरपरिचित रहा है।
अजमेर शहर में 16 मई, 1963 को मराठी परिवार में जन्मे श्री गजानन महतपुरकर ने राजस्थान विश्वविद्यालय से विज्ञान विषय में स्नातक की डिग्री ली और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया। इसके पश्चात पत्रकारिता के क्षेत्र में आए। आरंभ में कुछ दैनिक न्याय में काम किया और 1980 से 1989 तक दैनिक नवज्योति में नौ साल तक उप सम्पादक, मुख्य संवाददाता एवं मुख्य उप सम्पादक के रूप में काम किया। वर्ष 1984 से 1989 तक आकाशवाणी के अजमेर संभाग के संवाददाता भी रहे। उन्होंने रिपोर्टिंग करते हुए न केवल बेहतरीन स्टोरीज की, अपितु कॉपी राइटिंग पर भी उनकी गहरी पकड़ थी। न्यूज एडिटिंग भी परफैक्ट किया करते थे। कुल मिला कर पत्रकारिता में उनकी अपनी विशेष पहचान रही। उनकी हैंड राइटिंग बहुत खूबसूरत थी। एक बार कलैक्ट्रेट में पुलिस लाठीचार्ज का शिकार हुए, जब वहां प्रदर्शन के लिए पत्रकार एकत्रित हुए थे। उनके साथ वरिष्ठतम पत्रकार स्वर्गीय श्री मोहनराज भंडारी को भी पुलिस ने अपना निशाना बनाया था। कई पत्रकारों ने भाग कर जान बचाई।
श्री महतपुरकर मूलत: काव्य विधा की प्रतिभा रहे हैं। उनकी जिह्वा पर सरस्वति विराजमान है। वाणी अत्यंत सुमधुर है। विशेष रूप से हिंदी भाषा का उच्चारण सुस्पष्ट है। उनके सृजनात्मक सफर की बात करें तो 13 वर्ष की आयु से ही उनकी काव्य, कहानी एवं विविध सृजनात्मक लेखन में गहन रुचि रही। वर्ष 1979 से आकाशवाणी के जयपुर केन्द्र और वर्ष 1995 के पश्चात मुंबई केन्द्र से कविताओं, कहानियों एवं वार्ताओं के प्रसारण के लिए नियमित कलाकार के रूप में पंजीकृत। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में भी कविताओं, कहानियों एवं अन्य रचनाओं का समय-समय पर प्रकाशन हुआ है। अनेक काव्य गोष्ठियों, कवि सम्मेलनों, दबंग टीवी के बहुत खूब तथा सब टीवी के वाह -वाह कार्यक्रम में भी सहभागिता रही है। मुंबई दूरदर्शन एवं जी 24 तास द्वारा रेल सम्बंधी मुद्दों पर समय-समय पर आयोजित मराठी परिचर्चा में पश्चिम रेलवे के प्रतिनिधि के रूप में सहभागिता निभाते हैं।
खैर, वर्ष 1989 में रेल सेवा में प्रवेश किया। 13 सितम्बर, 2001 से 13 मार्च, 2012 तक जनसम्पर्क अधिकारी(क्षेत्रीय प्रचार) एवं 15 मार्च, 2012 से निरंतर पश्चिम रेलवे, चर्चगेट, मुंबई में वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी के पद पर हैं। वर्ष 1994 में पश्चिम रेलवे के चर्चगेट, मुंबई स्थित जनसम्पर्क विभाग में प्रवेश के पश्चात विविध जनसम्पर्क दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वाह किया है। समय-सम पर विभिन्न प्रदर्शनियों के आयोजन में मुख्य भूमिका, पश्चिम रेलवे की गृह पत्रिका रेल दर्पण के वरिष्ठ कार्यकारी सम्पादक के रूप में निरंतर कार्य निर्वाह किया है। सृजनात्मक उत्कृष्टता के लिए वर्ष 2011 में देश की सर्वश्रेष्ठ गृह पत्रिका के राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमती प्रतिभा पाटील के हाथों सम्मानित हुए। 50 से अधिक प्रतिष्ठित पुरस्कार पा चुकी ‘रेल दर्पणÓ के 25 वें रजत जयंती विशेषांक अप्रैल, 2016 व 28 वें अंक महिला एवं बाल सुरक्षा विशेषांक में उनकी अहम भागीदारी रही है। पश्चिम रेलवे की गतिविधियों एवं उपलब्धियों से सम्बंधित आपके विभिन्न विशेष लेखों का प्रमुख समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशन जारी है।
इसके अतिरिक्त वर्ष 1995 से निरंतर पश्चिम रेलवे के विभिन्न क्षेत्रों में नई रेल परियोजनाओं के उद्घाटन, रेल सेवाओं के शुभारम्भ तथा नई रेल लाइनों या आमान परिवर्तन कार्यों के शिलान्यास हेतु प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री एवं रेल मंत्री सहित विभिन्न अति विशिष्ट व्यक्तियों की मौजूदगी में सम्पन्न लगभग 150 से अधिक महत्वपूर्ण समारोहों के प्रभावशाली मंच संचालन का व्यापक अनुभव है।
जनसम्पर्क के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 2010 में रेलवे बोर्ड के राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक प्रतिष्ठित रेल मंत्री पुरस्कार तथा वर्ष 1998, वर्ष 2003 एवं वर्ष 2014 में क्षेत्रीय स्तर के सर्वाधिक प्रतिष्ठित महाप्रबंधक पुरस्कार से सम्मानित हुए हैं। इनके अलावा राजभाषा हिंदी में अधिकाधिक कामकाज एवं डिक्टेशन देने हेतु तथा टिप्पण-आलेखन, स्वरचित काव्य पाठ, निबंध लेखन एवं वाक् प्रतियोगिता जैसी अनेक क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पिछले कई वर्षों से प्रति वर्ष निरंतर अनेक पुरस्कार प्राप्त किए हैं।

-तेजवानी गिरधर
7742067000
tejwanig@gmail.com

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