खुशी में सीटी क्यों बजाई जाती है?

मेरे एक मित्र ने एक टिपिकल सा सवाल पूछा है – खुशी में सीटी क्यों बजाई जाती है? जहां तक मेरी समझ है, मनुष्य की मानसिक अवस्था से जुड़े इस सवाल का मोटे तौर पर जवाब ये है कि यह हमारी अभिव्यक्ति की प्रवृत्ति की निष्पत्ति है। असल में प्राणी मात्र में अनुकूल व प्रतिकूल … Read more

अनूठी संस्कृति : चौराहे, तिराहे व मार्ग के भी देवता होते हैं?

हिंदू धर्म में तैंतीस कोटी अर्थात करोड़ देवी-देवता माने जाते हैं। हालांकि इसको लेकर मतभिन्नता भी है। कुछ जानकारों का कहना है कि कोटि का अर्थ करोड़ तो होता है, मगर कोटि का अर्थ प्रकार भी होता है। उनका कहना है कि देवता तैंतीस कोटि अथवा प्रकार के होते हैं। जो कुछ भी हो, मगर … Read more

क्या अभिमंत्रित जल असरदार होता है?

आपने देखा होगा कि किसी भी पूजा अनुष्ठान के बाद पंडित सभी पर जल के छींटे डाला करते हैं। प्रसाद के रूप में जल का आचमन करवाते हैं। यहां तक कि शुद्धि के लिए उठावने के समापन पर भी जल के छींटे डाले जाते हैं। सवाल उठता है कि क्या जल के ये छींटे वाकई … Read more

शुक्रिया कहीं उऋण होने की कीमिया तो नहीं?

किसी ने अगर हमारी मदद की है तो उसका शुक्रिया अदा करना और धन्यवाद देने का चलन है। इसी प्रकार कोई त्रुटि होने पर सॉरी कहने का भी रिवाज है। यह शिष्टाचार का अंग है। क्या शिष्टाचार के इतर भी इनका कोई महत्व है? कहीं ये ऋण से उऋण होने की कीमिया तो नहीं? यह … Read more

झूठ बोले कौआ काटे, कोई और पक्षी क्यों नहीं?

आपने देखा होगा कि यदि कोई कहीं जा रहा होता है तो मारवाड़ी में यह पूछना अशुभ माना जाता है कि कठे जावे है? उसकी बजाय ये पूछा जाता है सिद जावे है? वजह साफ है। ककार को अच्छा नहीं माना जाता। बड़ी दिलचस्प बात है कि जितने भी सवाल हैं, क्या, कब, कहां, कौन, … Read more

एक बटन की गैर मौजूदगी ने हरवा दिया बेरिस्टर को

नियम की बड़ी महत्ता है। इस जगत में अनियामक कुछ भी नहीं। सभी विद्वान नियम की पालना पर जोर देते हैं। हम तो फिर भी अखिल ब्रह्मांड की बहुत छोटी, बहुत ही छोटी सी इकाई हैं, मगर स्वयं प्रकृति भी नियम की पालना करती है। बेशक उसमें भी कभी विक्षोभ होता है, मगर अमूमन वह … Read more

जूनियर-सीनियर जर्नलिस्ट का अंतर समाप्त हो गया

पिछले ब्लॉग में प्रदेश के सुपरिचित वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्री श्याम सुंदर शर्मा के जुड़े प्रसंग को छुआ तो यकायक दैनिक भास्कर के जयपुर मुख्यालय में काम करने के दौरान घटित कई दृश्य फिल्म की तरह दिमाग में घूमने लगे। अनेक अनुभवों में से एक आपसे साझा कर रहा हूं। वहां काम करने के दौरान … Read more

जिसका राज, उसी के पूत बनिये, खुश रहेंगे

बुद्धिजीवियों में कबीर व उनके पुत्र कमाल का एक प्रसंग खूब चर्चा में रहा है। पहले उस पर बात करते हैं कि वह क्या था और फिर उसके निहितार्थ पर गुफ्तगू करेंगे। एक बार कबीर व उनके पुत्र कमाल एक चक्की के पास बैठे थे। संसार पर बातचीति कर रहे थे। कबीर ने जो कहा, … Read more

लड़की को एक से अधिक लड़कों के साथ दोस्ती रखने का अधिकार!

लड़के-लड़कियों के बीच संबंधों में कितना नाटकीय बदलाव आने लगा है, इसका अहसास हाल ही एक प्रेंक वीडियो यूट्यूबर के एक शूट में देखने को मिला। उसे उचित अथवा अनुचित ठहराना मूर्खता ही कहलाएगी, क्योंकि वक्त बदल गया है। होता ये है कि एक गार्डन में एक लड़का-लड़की आपस में झगड़ रहे होते हैं। यूट्यूबर … Read more

फालतू की बातें बहुत करते हैं हम

हम कई बार फालतू के सवाल करते हैं। जैसे किसी के घर गए और वह खाना खा रहा है तो यकायक हम पूछ बैठते हैं, खाना खा रहे हो। या ये ही पूछ बैठते हैं कि बैठे हो? अव्वल तो ये सवाल ही बेमानी हैं। जो दिख रहा है, उसी के बारे क्या पूछना? दिलचस्प … Read more

नमस्ते व नमस्कार में क्या अंतर है?

हाल ही मेरे मित्र जाने-माने फोटो जर्नलिस्ट सत्यनारायण जाला ने एक पोस्ट भेजी, जिसमें बताया गया है कि नमस्ते व नमस्कार पर्यायवाची नहीं हैं। इनका भिन्न अर्थ है। बाद में सोशल मीडिया पर यह पोस्ट अलग शब्दावली में भी पायी। स्वाभाविक है कि उन्होंने किसी अन्य सज्जन की ओर से भेजी गई पोस्ट को कॉपी-पेस्ट … Read more

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