अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग तीन मित्रों, अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाओं के विषय पर जब लिखने का मन हुआ तो मुझे अंदाजा नहीं था कि यह गले पड़ जाएगा। कहते हैं न कि गए थे नमाज पढऩे और रोजे गले पड़ गए। वैसी ही हालत हुई है मेरी। असल में जिन पत्रकारों व साहित्यकारों को गहरे से … Read more

अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग दो ताजिंदगी दैनिक नवज्योति से जुड़े रहे श्री नरेन्द्र चौहान लाजवाब इंसान तो हैं ही, खबरनसीस भी अपनी किस्म के इकलौते हैं। चंद लफ्जों में उनका इजहार करने के लिए इतना कहना ही काफी होगा- ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर। यह उनके मिजाज में तो है ही, लफ्जों की बाजीगरी में … Read more

अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

भाग एक राजस्थान में अजमेर पत्रकारिता की पाठशाला रही है। आज राज्य में पत्रकारिता का जो कल्चर है, उसमें अजमेर की अहम भूमिका है। बेशक राष्ट्रदूत व राजस्थान पत्रिका का भी योगदान रहा है, मगर अजमेर में स्थापित दैनिक नवज्योति के मुख्यालय व दैनिक न्याय ने ऐसे कई पत्रकारों को जन्म दिया है, जो आज … Read more

चंद्रयान : कौन कहा रहा है कि मोदी फेल हो गए?

चंद्रयान 2 से संपर्क टूटने के बाद इसरो प्रमुख सीवन की पीठ पर हाथ रख कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कहना कि विज्ञान में कभी असफलतायें नहीं होती, विज्ञान में सिर्फ प्रयोग और प्रयास किये जाते हैं, बिलकुल सही है। ऐसा करके उन्होंने न केवल इसरो के वैज्ञानिकों को निराश न होने की सीख … Read more

क्या संघ प्रमुख मोहन भागवत दरगाह जियारत करेंगे?

हाल ही देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात हुई। बताया जाता है कि इस दौरान दोनों के बीच हिन्दू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने और भीड़ द्वारा हत्या की घटनाओं (मॉब लिंचिंग) सहित कई मुद्दों पर बातचीत हुई। जानकारी के … Read more

धारा 370 का विरोध पाक परस्ती कैसे हो गया?

कश्मीर हमारा आतंरिक मामला तो पाक व यूएन से काहे का डर? जो काम पिछले सत्तर साल में कोई सरकार नहीं कर पाई, वह भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल करने के बाद कर दिखाया। जी, बात जम्मू-कश्मीर में धारा 370 व 35 ए को हटाने की है। यह भाजपा का जन्मजात चुनावी मुद्दा था। जाहिर … Read more

कांग्रेस : ऐतराज के वावजूद परिवारवाद की अनिवार्यता

लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से पराजित होने के बाद नैतिकता के आधार पर राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोडऩे के पश्चात काफी दिन बाद भी नया पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं बनने से कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता चिंतित हैं। यह स्वाभाविक भी है, क्यों कि इस मसले के साथ उनका राजनीतिक भविष्य जुड़ा हुआ है। … Read more

राष्ट्रवाद की खातिर संविधान को ताक पर रखने में क्या ऐतराज है?

ऐसा लगता है कि भारत के संविधान निर्माताओं से एक गलती हो गई। उन्हें संविधान में यह भी लिख देना चाहिए था कि अगर देश हित का मुद्दा हो तो संविधान को तोडऩे-मरोडऩे में कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए। उनकी इसी गलती का परिणाम ये है कि कश्मीर में धारा 370 व 35 ए हटाने … Read more

क्या भाजपा का कांग्रेस मुक्त भारत का सपना कभी साकार हो पाएगा?

यह एक सर्वविदित सत्य है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल के आखिरी दिनों तक जब प्रमुख विपक्षी दल भाजपा अपनी भूमिका में पूरी तरह से नाकामयाब रहा, तब समाजसेवी अन्ना हजारे का आंदोलन खड़ा हुआ। वह इतना प्रचंड था कि कांग्रेस की जड़ें ही हिला कर रख दीं। अन्ना हजारे की गलती ये … Read more

मीडिया अब भी हमलावर है कांग्रेस पर

हमने पत्रकारिता में देखा है कि आमतौर पर मीडिया व्यवस्था में व्याप्त खामियों को ही टारगेट करता था। सरकार चाहे कांग्रेस व कांग्रेस नीत गठबंधन की या भाजपा नीत गठबंधन की, खबरें सरकार के खिलाफ ही बनती थीं। वह उचित भी था। यहां तक कि यदि विपक्ष कहीं कमजोर होता था तो भी मीडिया लोकतंत्र … Read more

अफसोस कि पत्रकारिता के इतने निकृष्ट दौर का मैं गवाह हूं

गुुरुवार को एबीपी न्यूज चैनल पर चल रही एक बहस देखी। उसे देख कर बहस की एंकर रुबिका पर तो दया आई, मगर खुद आत्मग्लानी से भर गया। पत्रकारिता का इतना मर्यादाविहीन और निकृष्ट स्वरूप देख कर सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल पर अनुभवहीन युवति को कैसे एंकर बना दिया … Read more

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