अरुणा रॉय ने खान मजदूरों की उपेक्षा पर जताई चिंता
भीलवाड़ा, 4 जनवरी
फ़िरोज़ खान,बारां
भीलवाड़ा जिले के हज़ारों खनन मज़दूर सिलिका युक्त धूल कणों के फ़ेफ़डों में जाने की वजह से सिलिकोसिस जो कि एक लाइलाज बीमारी है इसके साथ ज़िन्दगी की जंग लड़ रहे हैं। ये पीड़ित सरकारी मदद की आस में न्यूमोकोनोसिस बोर्ड के चक्कर लगाते लगाते थक जाते हैं लेकिन सिलिकोसिस बीमारी का प्रमाण पत्र उन्हें नहीं मिल पाता और देर सवेर ये प्रमाणपत्र मिल गया है तो भी वे मुआवज़े के रूप में मिलने वाली राशि का कई महीनों से इंतज़ार कर रहे हैं। मज़दूर किसान शक्ति संगठन की ओर से आज भीलवाड़ा के कलेक्ट्रेट के सामने सिलिकोसिस पीड़ित मज़दूरों के साथ हुई जन-सुनवाई में जिले के सैकड़ों सिलिकोसिस पीड़ितों ने अपना ये दर्द बयां किया।
उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा जिले के आस-पास के इलाकों में हज़ारों श्रमिक पत्थर की खदानों में काम करते हैं उसके साथ ही पत्थर-गढ़ाई, पत्थर-पिसाई का काम करते हैं। जिन श्रमिकों को सिलिकोसिस बीमारी हुई है उनके उपचार एवं पुनर्वास के लिए श्रम विभाग द्वारा भवन निर्माण पंजीयन बोर्ड में प्रत्येक श्रमिक को पंजीकृत करने एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन श्रमिकों की स्वास्थय जांच कर इन्हें सिलिकोसिस प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान है। जिसमें उनको सरकारी सहायता के रूप में 1 लाख रुपये बीमारी के दौरान इलाज में मदद और 3 लाख रुपये पीड़ित की मृत्यु पर उसके परिवार को दिए जाते हैं। परंतु देखा गया है कि मुआवज़े की यह राशि पीड़ितों को समय पर नहीं मिल पाती। जन सुनवाई में कुछ ऐसे मामले भी सामने आये जहाँ कई पीड़ित मुआवज़े की राह देखते-देखते उनकी मृत्यु हो गई।
जिले के आसीन्द तहसील के ओझियाणा गाँव की पूनी देवी के पति की मृत्यु सिलिकोसिस की वजह से दो साल पहले हुई थी लेकिन उनके पति के सिलिकोसिस पीड़ित होने का कोई प्रमाण पत्र उनके पास नहीं है और इसीलिए उनकी कमज़ोर आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्हें आज तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है। पूनी देवी स्वयं भी सिलिकोसिस से पीड़ित है जिसका प्रमाण पत्र उनके पास है लेकिन पिछले दो महीने से इलाज के लिए वे मुआवज़ा राशि का इंतज़ार कर रही हैं। एक ओर तो पूनी देवी का शरीर अब उनका साथ नहीं देता जिसकी वजह से उन्हें दो वक़्त की रोटी जुटाना भी दूभर हो जाता है वहीँ दूसरी ओर उनका बड़ा बेटा जो गुजरात में काम करता है वह उन्हें कोई मदद नहीं करता। उनके दो छोटे बेटे जो स्कूल में पढ़ते हैं उन्हें पालनहार योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
रेला का बाडिया के भैरुँ सिंह ने करीब बीस साल तक खदानों में काम किया काम के दौरान ही जब उन्हें श्वास संबंधी तकलीफें ज़्यादा होने लगीं तो उन्होंने अपना इलाज करवाया। डॉक्टरों ने उन्हें टी बी होने की बात बताई तब उन्होंने अपने स्तर पर ही इलाज करवाया पर धीरे धीरे जब उनकी तकलीफ और बढ़ती गई तब उन्होंने भीलवाड़ा में फिर से जांच करवाई तब उन्हें सिलिकोसिस का पता चला। चार बार धक्के खाने के बाद उन्हें प्रमाण पत्र मिल पाया और पिछले तीन साल से भैरुँ सिंह मजदूरी छोड़कर अपने गाँव में ही रहने को मजबूर है।
आसीन्द पंचायत समिति की रघुनाथपूरा ग्राम पंचायत के कल्याणपुर गांव के गोपी और शंकर ने अपनी पीड़ा बयां की। गोपी बोल नहीं सकते हैं और एक हाथ भी काम नहीं करता है लेकिन उनका आज तक विकलांगता प्रमाण पत्र नहीं बना है। ये पत्थर के खान में काम करते थे जिस वजह से इनको सिलिकोसिस बीमारी हो गई और मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। इनकी बेटी स्कूल नहीं जा पा रही है, परिवार की हालत बहुत ही ख़राब है। ऐसे 400 से भी अधिक लोगों ने आज जन सुनवाई में अपना पक्ष रखा।
जन सुनवाई में प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय भी पहुंची और उन्होंने कहा कि एक मज़दूर खदानों से जो पत्थर निकालता है उसी से संसद भवन तक बना है और बड़े बड़े बंगले भी बनते हैं लेकिन वे मज़दूर आज बहुत परेशान और लाचार जिंदगी जीने को मजबूर है।
सुनवाई में जिला कलक्टर भीलवाड़ा भी पहुंचे और उन्होंने सुनवाई में आये और उन्होंने सिलिकोसिस की बीमारी से पीड़ितों की जाँच, मुआवजे एवं नियंत्रण के बारे में आये हुए लोगों को आश्वस्त किया कि दिनांक 1 फरवरी 2017 से जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सिलिकोसिस की जाँच की जायेगी और जाँच में ये लगेगा कि उनको सिलिकोसिस पीड़ित होने की संभावना होगी तो उनके लिए टोकन जारी किया जायेगा और न्यूमोकोसिस बोर्ड के पास वही लोग जायेंगे जिससे लोगों को तुरंत प्रमाण पत्र मिल सकेगा।
उन्होंने ये आश्वासन भी दिया क़ि जिन लोगों को प्रमाण पत्र जारी कर दिया जायेगा उनको कलेक्ट्रेट या कहीं और किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरुरत नहीं है ये प्रमाण पत्र का विवरण सीधे ही कलक्टर दफ्तर पहुँच जायेगा। सभी दस्तावेज़ तहसीलदार और पटवारी व ग्रामसेवक के माध्यम से ले लिए जायेंगे और उसके बाद उनके बैंक खाते में भुगतान कर दिया जाये।
उन्होंने कहा कि जिले में जितने भी सिलिकोसिस पीड़ित हैं उन सभी का भुगतान जनवरी के अंत तक आवश्यक रूप से कर दिया जायेगा।
जन सुनवाई में प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे, शंकर सिंह, विकास सिंह एवं कई अन्य ने भी अपने विचार रखे।
जन सुनवाई आयोजित करने में लोकतंत्रशाला, जीएसवीएस संस्था अजमेर और जिला प्रशासन का भी सहयोग रहा।