जीते जी मर रहे सिलिकोसिस पीड़ित, मरने के बाद भी मुआवजा नहीं
हवा में ज़हर घोल रहा अवैध खनन माफिया
फ़िरोज़ खान
जयपुर 21 जून । जवाबदेही कानून को लेकर सुचना एवं रोज़गार अभियान, राजस्थान द्वारा दिए जा रहे धरने के तीसरे दिन आज धनार्थियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, तथा शराबबंदी के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया.
राजस्थान में शिक्षा की स्थितियों पर चर्चा करते हुए आस्था ससंस्थान, उदयपुर के हरी ओम सोनी ने कहा कि प्रदेश में आज भी 3 लाख 50 हजार बच्चे ऐसे हैं जिनके लिए शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है. स्चूलों के ठीक से संचालन करने के लिए 70 हजार शिक्षकों की ज़रुरत है. सरकार यह व्यवस्था करने की बजाय स्कूलों को बंद करने में लगी है. अब तक सरकार 20 हजार स्कूल बंद कर चुकी है . उन्होंने कहा कि सामुदायिक जागरूकता और निगरानी से ही शिक्षा की व्यवस्था को सुधारा जा सकता है. शाला प्रबंधन तथा निगरानी समितियों को एक्टिव करके ही इस दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है. उन्होंने उदयपुर जिले के खैरवाडा ब्लॉक की भोजवाडा पंचायत के सरपंच राजकुमार का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने अपनी जागरूकता से अपने क्षेत्र में स्चूलों में उल्लेखनीय सुधार किया. बाद में शिक्षा के सवालों को लेकर राधाकृषण शिक्षा स्कूल में उच्चाधिकारियों को ज्ञापन दे कर धरने के दौरान सामने समस्याओं सहित गावों में आ रही समस्याओं के समाधान की मांग की.
धरने में स्वास्थ्य की स्थितियों को लेकर प्रतिभागियों ने सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों की कमी तथा निशुल्क दवाई न मिलने की बात उठाई. ख़ास तौर पर राज्य के कई हिस्सों के सिलिकोसिस के रोगी भी इस धरने में पहुंचे और उन्होंने अपनी पीड़ा सबके सामने रखी.
सिलिकोसिस के मरीजों का कहना’ था कि उनको सिलिकोसिस की जांच तथा प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. सर्टिफिकेट जारी करने के लिया अक्सर रिश्वत की मांग की जाती है. ज्यादातर मरीजों की शिकायत थी कि उनको समय पर मुआवजा नहीं मिल पा रहा है. कई लोग तो मुआवजे का इंतज़ार करते-करते ही मर जाते हैं.
सिलिकोसिस के मरीजों की दयनीय स्थिति के मद्देनज़र धरने से एक स्वर में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि सिलिकोसिस के सभी मरीजों को पेंशन दी जानी चाहिए.
भीलवाड़ा जिला के हुरडा ब्लॉक के कानिया गाँव की 35 वर्षीय जरीना ने बताया कि उनके पति अमीरदीन की मृत्यु 24 दिसम्बर 2016 को हो चुकी है. जरीना के 14 तथा 9 वर्ष के दो नाबालिग बेटे है जो स्कूल में पढ़ रहे हैं. जरीना ने कई स्तर पर मुआवजा लेने की कोशिश की मगर उनके पति की मौत के बाद मिलने वाले 3 लाख रुपये का मुआवजा आज तक नहीं मिला है. इसी तरह सिरोही जिले के पिण्डवाडा के नथाराम ने भी अपनी व्यथा सबके सामने रखी.
सिरोही जिले के ही केराराम का 40 वर्षीय बीटा लीलाराम भी पत्थर की घड़ाई का काम करते-करते सिलिकोसिस से मर गया. उसकी पत्नी रानी भी टी.बी. से मर गयी. अब लीला तथा रानी के 6 छोटे-छोटे बच्चों की पूरी जिम्मेवारी केराराम पर आ गयी है मगर केराराम को आज तक सिलिकोसिस के मुआवजे का एक भी रूपया नहीं मिल पाया है.
नीम का थाना क्षेत्र में अवैध खनन के विरुद्ध आन्दोलनरत कैलाश मीणा कहा कि उनके इलाके में अवैध खनन करवा कई खनन माफिया लोगों को सिलिकोसिस परोस रहे हैं. इन लोगों पर गैर-इरादनन हत्या का मामला दर्ज करवाया जाना चाहिए, मगर कहीं कोई सुनवाई नहीं होती.
धरने के तीसरे दिन के अंत में शराबबंदी को लेकर भी महिलायों ने अपने विचार रखे तथा राज्य में शराबबंदी की मांग रखी.
बाद में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा शराबबंदी की विभिन्न मांगों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने विभिन्न विभागीय अधिकारीयों से मिलकर वार्ता की.
धरने के चौथे दिन कल राशन, नरेगा, पेंशन और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों से सम्बंधित मुद्दों पर चर्चा होगी. धरने में आज विभिन्न जिलों से आये 30 संगठनों के 400 लोगों ने भाग लिया ।