जनता के मुद्दों पर होगा राजस्थान में जन आन्दोलन- अरुणा रॉय

23rd juneफ़िरोज़ खान
जयपुर 23 जून ।राजस्थान की सरकार आम जनता के साथ खिलवाड़ कर रही है, गरीबों के हकों पर डाका डाला जा रहा है. 10 लाख लोगों की पेंशन रोक दी गई, खाध्य सुरक्षा से एक करोड़ लोग वंचित कर दिये गए हैं. नरेगा में लोगों को न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जा रही है, मांगने पर काम नहीं मिल रहा है, बर-बार मांग किये जाने पर भी स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण निदेशालय की स्थापना नहीं की गई है. लोगों की शिकायतों का समुचित राहतजनक समाधान नहीं किया जा रहा है. बिना रिश्वत के लोगों के काम नहीं हो रहे हैं, लोगों की कहीं भी किसी भी स्तर पर गरीबों की सुनवाई नहीं हो रही है, ऐसी स्थिति में हम लोगों के बीच लोगों के मुद्दे लेकर जा रहे हैं ताकि उन पर जन आन्दोलन खड़ा किया जा सके.”

उपरोक्त विचार आज जयपुर में सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान की से ओर से आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में सामाजिक कार्यकर्त्ता अरुणा रॉय ने रखे. रॉय ने कहा कि स्वच्छ भारत के नाम पर लोगों के निजता के अधिकार को छीना जा रहा है, लोगों को जेल भेजा जा रहा है. अब तो स्वच्छ भारत के नाम पर कामरेड जफ़र हुसैन जैसे राजनीतिक कार्यकर्त्ता की हत्या तक की जा चुकी है.

राजस्थान का माहौल पूरी तरह से बिगड़ता जा रहा है, उन्मादी भीड़ के हाथ में कानून व्यवस्था आ गई है. प्रदेश में दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं एवं घुमंतू समुदायों पर अराजक भीड़ के हमले हो रहे हैं. बंजारे सताए जा रहे हैं. पहलु खान को मार डाला गया है, हर तरफ अराजकता की स्थिति है, सरकार सुनने को तैयार नहीं है. नौकरशाही अपनी जवाबदेही से भाग रही है.

ऐसे विकट समय में राजस्थान के जन संगठन जवाबदेही कानून बनाने की अपनी मांग को दोहरा रहे हैं तथा वे चाहते हैं कि जवाबदेही का कानून जल्द से जल्द बनाया जाये इसके लिए एक राज्य व्यापी आन्दोलन छेड़ा जा रहा है जो एक साल तक चलेगा.

प्रेस कांफ्रेंस में दी गई विज्ञप्ति के अनुसार जानकारी दी गई कि जवाबदेही कानून एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन हेतु सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान ने 1 दिसंबर, 2015 से 10 मार्च, 2016 तक एक 100-दिवसीय राज्य-स्तरीय जवाबदेही यात्रा आयोजित की जो राजस्थान के सभी 33 जिलों में गयी. जवाबदेही कानून के मसौदे और अभियान की अन्य मांगों पर हजारों लोगों ने अपना समर्थन दिया. इस दौरान राज्य भर से अभियान द्वारा राजस्थान संपर्क पोर्टल पर 9458 शिकायतें दर्ज की गईं जिनमें से 5788 शिकायतों को निरस्त ही कर दिया गया और सरकारी दावे के अनुसार कुल शिकायतों में से 3401 शिकायतों का निदान किया किया. जबकि अभियान के लोगों ने प्रत्येक व्यक्ति से बात की तो वास्तव में 1596 लोगों की शिकायतों का ही निदान हुआ है जो कुल शिकायतों का 16.9 प्रतिशत ही है. साथ ही 10 मार्च को 5,000 से भी ज्यादा लोगों ने जयपुर में इकठ्ठा होकर विधान-सभा के सामने इन मांगों को लेकर प्रदर्शन भी किया.

हमने 10 मार्च को जवाबदेही कानून का मसौदा और एक मांग-पत्र गृह मंत्री श्री गुलाब चंद कटारिया को भी सौंपा था और उन्होंने हमें आश्वस्त किया गया था कि विधान सभा तथा सरकार के स्तर पर इन पर विचार कर उचित कार्यवाही की जाएगी. लेकिन एक माह बीतने के बाद भी उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई. 11 अप्रेल, 2016 को राज्य के लगभग 150 से अधिक उपखंडों में जवाबदेही कानून एवं अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन दिए.

इस ज्ञापन के द्वारा हम ये मांग किये कि ‘गुड गवर्नेंस’ का वादा जो सरकार पिछले कई सालों से करती आ रही है उस पर अमल करते हुए सरकारी तंत्र में पारदर्शिता, भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक पुख्ता व्यवस्था कायम करने के लिए ‘भागीदारी ,जवाबदेही एवं सामाजिक अंकेक्षण कानून’ के मसौदे और अभियान की अन्य मांगों पर तुरंत विचार कर कार्यवाही की जाये. इसके बाद 1 जून से 22 जून 2016 तक शहीद स्मारक पर पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर धरना दिया गया जिसमें मुख्य सचिव महोदय से भी मुलाकात की. उसके बाद शिक्षा एवं अन्य मांगों को लेकर 2 सितम्बर 2016 को विधानसभा के बाहर शिक्षकों और नया विभागों में पारदर्शी स्थानांतरण नीति को लेकर प्रदर्शन किया गया. 26 अक्टूबर 2016 को इन्ही सामाजिक सुरक्षा एवं जवाबदेही कानून के लिए शहीद स्मारक पर प्रदर्शन किया गया और इसे जनता के बीच चर्चा के लिए रखे जाने और बाद में विधानसभा द्वारा पास किये जाने की मांग रखी गई. सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं जिनमें विभिन्न श्रेणियों की पेंशन जिसमें 10 लाख लोगों की पेंशन रोक दी गई एवं अन्य सभी मुद्दों के क्रियान्वयन को तुरंत ठीक किये जाने की मांग की गई. 22 नवम्बर 2016 को स्वास्थ्य एवं मातृत्व हक को लेकर शहीद स्मारक पर धरना दिया गया. इस बीच विभिन्न जिलों और उपखंडों में स्थानीय लोगों द्वारा धरने दिए और प्रदर्शन किये. समय-समय पर उपखंड और जिलों में भी जवाबदेही कानून और सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर धरने-प्रदर्शन होते किया जाते रहे हैं.

जवाबदेही कानून एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के वेहतर क्रियान्वयन हेतु अभियान के कई प्रतिनिधिमंडल लगभग 8 बार राज्य के मुख सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री एवं लगभग 12 विभागों के सचिवों से मिलकर अपनी मांगों से अवगत कराया है और अतिशीघ्र कार्यवाही की मांग की है.

6 मार्च 2017 को उदयपुर संभाग मुख्यालय धरना दिया गया और उसके बाद जयपुर में 19 से 22 जून 2017 तक ज्योतिनाग्र टी पॉइंट पर धरना दिया गया जिसमें जवाबदेही कानून और जनता के घोषणा पत्र के मसौदे को सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच रखा गया है. भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई प्रतिनिधि जनमंच नहीं आये और ना ही उनकी कोई प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है.

जिन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि जनमंच में आये उनका सकारात्मक रुख रहा. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डी.के. छागानी ने कहा कि हम सभी मांगों से सहमती रखते हैं और अपनी पार्टी के अन्दर इन सभी मांगों पर चर्चा कर अपने घोषणा पत्र में शामिल करेंगे.

कांग्रेस पार्टी की राज्य उपाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी अर्चना शर्मा ने कहा कि हम जवाबदेही कानून के पूरी तरह पक्ष में है ये कानून बनना चाहिए और इस जनता के इस घोषणा पत्र पर पार्टी के अन्दर चर्चा करेंगे और शामिल करने की कोशिश करेंगे.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की प्रतिनिधि एवं जयपुर जिला सचिव सुमित्रा चौपडा ने कहा कि जो भी आम जन के साथ जुड़े हुए मुद्दे हैं उन पर हम भी संघर्ष कर रहे हैं और इस जन घोषणा पत्र के मसौदे से पार्टी की राज्य और केन्द्रीय कमिटी को अवगत कराएँगे और अपने घोषणा पत्र में जहाँ तक संभव होगा प्रत्येक मुद्दे को शामिल करेंगे ।

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