महाचमत्कारी देवाधिष्ठित 1116 जिन प्रतिमाएं पुनः गर्भगृह स्थापित

गच्छाधिपति आचार्यश्री जिनमणि प्रभ सूरिश्वरजी व जैनाचार्य जिनचन्द्र सूरिश्वरजी ने चतुर्विद संघ के साथ की प्रतिमाओं की स्तुति-वंदना

11217-1बीकानेर 01 दिसम्बर। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के गच्छाधिपति आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी की निश्रा में भुजिया बाजार के पांच शताब्दी से अधिक प्राचीन श्री चिंतामणि आदिनाथ मंदिर के भूगर्भ में स्थित महाचमत्कारी देवाधिष्ठित 1116 जिन प्रतिमाओं का पांच दिवसीय महिमामय प्राकट्य महोत्सव शुक्रवार को पूजा, आरती व प्रतिमाओं के पुनः गर्भगृह में प्रतिष्ठा के बाद संपन्न हुआ।

आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी ने मुनि व साध्वीवृंद तथा चतुर्विद संघ के प्रतिमाओं के दर्शन,वंदन व पूजन के दोपहर को विजय मुर्हूत में लगभग चार सौ वर्षों से भूगर्भ में स्थापित चमत्कारी प्रतिमा को गर्भगृह में पुनः स्थापित किया। कार्यक्रम के संरक्षक जैनाचार्य जिनचन्द्र सूरिश्वरजी महाराज एवं प्रवर्तनी साध्वी शशि प्रभा व कल्पलताश्रीजी आदि साध्वियों व मुनिवृंद के सान्निध्य में दुर्लभ प्रतिमाओं को पुनः स्थापित किया गया। श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास की ओर से सकलश्री संघ के सहयोग से दर्शनार्थ पूजा व अभिषेक के लिए निकाली गई प्रतिमाओं के महोत्सव में अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवक परिषद (के.यू.प.) की बीकानेर शाखा के कार्यकर्ताओं,जैन समाज व जैनतर समाज का, जिला व पुलिस प्रशासन व मीडिया का अनुकरणीय सहयोग रहा। चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष निर्मल धारिवाल, उपाध्यक्ष नरपत सेठिया व सचिव चन्द्र सिंह पारख, सदस्यों ने आभार व्यक्त किया है।

आचार्यश्री की निश्रा में पंचाहिन्का महोत्सव के अंतिम दिन सुबह सुवर्ण, रजत,कांस्य कलश से परमात्मा का अभिषेक व पूजन व दोपहर को श्री सतर भेदी पूजा, उसके बाद आरती की गई। पूजा का लाभ नेमचंदजी, भंवरी देवी डागा परिवार ने लिया। पूजा के दौरान आचार्यश्री जिन मणि प्रभ सूरिश्वरजी, मुनि व साध्वीवृंद तथा विचक्षण महिला मंडल, पिन्टू स्वामी, सुनील पारख व राजेश नाहटा आदि ने भक्ति गीत पेश किए। महोत्सव के दौरान मंदिर में नए ध्वज स्थापित किए गए तथा प्रतिमाओं को गर्भगृह में प्रतिष्ठित करने सहित विभिन्न बोलिया लगाई गई।

महोत्सव स्थल पर आचार्यश्री जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी ने प्रवचन में कहा कि पांच शताब्दी से अधिक प्राचीन बीकानेर नगर के मध्य में स्थित श्रीचिंतामणि जैन मंदिर जसे इतिहासकार चौबीसटाजी के नाम से संबंधित करते है। इस मंदिर के तलघर की 500 से 2200 वर्ष प्राचीन अतिशय युक्त, पंचधातुमय जिनबिंब एवं रत्नमय जिनबिंब महाचमत्कारी है । इनका दर्शन, वंदन व पूजन करने से पुण्योदय होता है। उन्होंने चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष निर्मल धारिवाल का वासक्षेप प्रदान कर तथा प्रन्यास के अन्य सदस्यों व अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद,बीकानेर शाखा के कार्यकर्ताओं को महोत्सव के माध्यम श्री संघ को पूजा, दर्शन व वंदन करने का सुअवसर दिलाने पर आशीर्वाद दिया।

जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के गच्छाधिपति मणि प्रभ सूरिश्वरजी व जैनाचार्य जिनचन्द्र सूरिश्वरजी महाराज महावीर भवन से चतुर्विद संघ के साथ श्री आदिनाथ चिंतामणि जैन मंदिर पहुंचे तथा प्राचीन प्रतिमाओं के दर्शन व वंदन किया। गच्छाधिपति जिन मणिप्रभ सूरिश्वरजी व जैनाचार्य जिनचन्द्र सूरिश्वरजी ने आपस धर्मचर्चा की तथा महोत्सव को महामंगलकारी व अनुकरणीय बताया।

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