बीकानेर-20मई-वरिष्ठ लेखक विधिवेत्ता स्व.उपध्यानचन्द्र कोचर की चतुर्थ पुण्यतिथि के अवसर पर रविवार को होटल मरुधर हेरिटेज में पर्यटन लेखक संघ महफिले अदब की तरफ से युवा सम्मान समारोह और युवा कवि सम्मेलन रखा गया।जिसमें बीकानेर शहर के अलावा आसपास के कस्बों-देशनोक,लूणकरणसर,खारी, पूनरासर,राजगढ़ से आये 30 से कम उम्र के कवियों ने अपना ताज़ा कलाम सुनाया।
कमला कोचर के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इंजी.निर्मल कुमार शर्मा ने कहा कि कोचर साहब ने हमेशा ही युवा कवियों लेखकों को बढ़ावा दिया है।इसलिए उनकी याद में युवा कवियों को प्रोत्साहन देना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि है।
प्रारम्भ में डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने कोचर के साहित्यिक अवदान पर तफ़सील से रौशनी डालते हुए कहा कि कोचर ने सात किताबें लिखीं जिनमे “हज़ार हवेलियों का शहर बीकानेर “शामिल है।
इस अवसर पर नवोदित कवयित्री जाह्नवी केवलिया व युवा कवि सोनू लोहमरोड़ का सम्मान किया गया।जाह्नवी को कमला कोचर व डॉ रचना शेखावत ने शाल ओढ़ाया।जबकि मुइनुदिन कोहरी ने सम्मान पत्र पेश किया।एड भगवती प्रसाद पारीक ने श्रीफल भेंट किया।
सोनू लोहमरोड़ को डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी व असद अली असद ने शाल ओढ़ाया।कमल किशोर पारीक ने सम्मान पत्र पेश किया।जबकि मोहन थानवी ने श्रीफल भेंट किया।
डॉ रचना शेखावत के मुख्य आथित्य में आयोजित युवा कवि सम्मेलन में युवा कवियों ने एक से बेहद कर एक कविता सुना कर दाद हासिल की।
कार्यक्रम का आग़ाज़ शहबाज़ हुसैन चौहान की गज़ल से हुआ-
अहसासे कमतरी के शिकार हैं आजकल
लोग ज़हनी तौर पर बीमार हैं आजकल
लूणकरणसर के युवा कवि गोविन्द शर्मा ने श्रंगार रस के मुक्तक सुना कर कार्यक्रम में नया रंग भर दिया-
हमारा दिल ये दीवाना मचलता हो करें क्या हम
ज़माना प्यार को दुश्मन समझता हो करें क्या हम
देशनोक से आये युवा कवि पवन कुमार शर्मा ने उम्मीद भरी कविता सुनाई कर वाह वाही लूटी-
मेरे हिस्से का सूरज भी निकल कर आएगा इक दिन
वो पत्थर सा खड़ा है है पिघल कर आएगा इक दिन
मेरे लफ़्ज़ों को अपनी चांदनी से करने को रोशन
वो मिरा जुगनू अंधेरों को निगल कर आएगा इक दिन
पूनरासर के युवा कवि पूनमचन्द गोदारा ने किसानों का दर्द बयान किया-
मज़दूर रै सीने टपकते/गाढ़े रगत स्यूं
महै सुण सकूँ/शोषण स्यूँ मुक्ति रा नारा
सुनील कुमार सोनू लोहमरोड़ ने तरन्नुम के साथ गीत सुना कर माहोल में संगीत भर दिया-
इस ग़म के आँचल में अपना भी घर है जी
मेरे जीवन के दर पे,जीवन भी डर है जी
युवा कवयित्री जाह्नवी केवलिया ने अपनी रचना ने मोजुदा हालात बयान किये-
बुज़ुर्ग हो रहे अपमानित/घर घर यही कहानी है
हक़ मार कर हमारा भर रहे तिजोरी
सत्ताधीशों की यही मनमानी है
श्रीराम उपाध्याय ने तिरंगे की अज़मत की बात कही-
लगता है सब भूल गये इस देश का भी ध्वज है याद दिला दूँ तुमको अपना तो ध्वज तिरंगा है
इरफ़ान खान ने अपनी कविता में मौत की सच्चाई बयान की-
मिट्टी को मिट्टी बुला रही है
बीते अच्छे बुरे पल हमको दिखा रही है
खारी गाँव के देवीलाल माहिया ने सुरीले अंदाज़ में गीत सुना कर वाह वाही लूटी-
प्यार का धागा जोड़ो रे
नफरत का रिश्ता तोड़ो रे
पुखराज सोलंकी ने आंधियो की बात की-
चल रही है आँधियाँ कुछ इस क़दर मुझ में
एक ख्वाब सहेजूँ तो दूसरा बिखर जाये।
इस मौके पर युवा प्रेस फोटोग्राफर एम् शाकिर को भी खिराजे अक़ीदत पेश किया।शाकिर के पिता एम दाऊद बीकानेरी ने रचना सुनाई।
ये रहे मौजूद-
डॉ प्रभा भार्गव,मोहन थानवी,शरद केवलिया,रहमान बादशाह,हरिमोहन जैन,कमल किशोर पारीक,एड भगवती प्रसाद पारीक,मन्जुल मुकुल वर्मा,शिवप्रकाश शर्मा,इरशाद ए सय्यद,बाबूलाल छंगाणी,जुगल किशोर पुरोहित,बी डी हर्ष,विजय जैन,क़ासिम बीकानेरी,मेहबूब देशनोकवी,मोहम्मद साबिर आदि।
कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ ज़िया उल हसन क़ादरी ने किया।प्रारम्भ में असद अली असद ने आगन्तुकों का स्वागत किया।आखिर में होटल के मैनेजर कमलकांत शर्मा व हेमचन्द बांठिया ने आभार व्यक्त किया।