इंटरनेट ऑफ थिंग्स विषय पर छः हफ्ते का कोर्स

जयपुर, 4 जून। सीएसआईआर-केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान(सीएसआईआर-सीरी) द्वारा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम तथा राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय के सहयोग से प्रदेश में पहली बार 200 घंटे का कौशल विकास कार्यक्रम ’’इंटरनेट ऑफ थिंग्स’’ विषय पर आयोजित किया गया है। 4 जून से 14 जुलाई तक चलने वाले इस छः सप्ताह के कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स विषय से जुड़े प्रदेश के विभिन्न प्रोफेसर्स,उद्यमी तथा छात्र-छात्राएं ट्रेनिंग में भाग ले रहे हैं।

यह कार्यक्रम मालवीय औद्योगिक क्षेत्र स्थित सीएसआईआर-सीरी, जयपुर सेन्टर, इन्क्यूबेशन कम इनोवेशन हब में संचालित किया जा रहा है। 4 जून, सोमवार से शुरु हुए इस कार्यक्रम के उद्धाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ललित के पंवार ने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफीशियल इंटेलिजेन्स, ऑग्मेन्टेड रिएलिटी, वर्चुअल रिएलिटी मशीन लनिर्ंग जैसे क्षेत्रों में कैरियर के लिए अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि आगे आने वाला समय इन्हीं तकनीकों का है और तकनीक की दुनिया में टिके रहने के लिए आने वाले समय की जरूरतों के हिसाब से खुद को पारंगत करना जरूरी है।

श्री पंवार ने कहा कि अब वह समय गया जब पारंपरिक डिग्रियों के आगे वोकेशनल ट्रेनिंग को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता था। आज डिग्री से ज्यादा उन लोगों की पूछ है, जिनके पास कौशल भी है। उन्होंने बताया कि नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (छैफथ्) के तहत वोकेशनल ट्रेनिंग के दस लेवल पीएचडी के बराबर दर्जा रखते हैं । ये एक से 10 तक लेवल ग्रेड के रूप में होते हैं और स्किल और ऎप्टिट्यूड के हिसाब से इन्हें मुहैया कराया जाता है। उन्होंने बताया कि विभिन्न लेवल खत्म करने पर मिलने वाले डिप्लोमा, स्नातक डिग्री, एमफिल और पीएचडी का दर्जा पारम्परिक डिग्री के समान ही है तथा प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा तथा आगे की पढ़ाई के लिये यह मान्य है।

श्री पंवार ने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर आधारित यह ट्रेनिंग कोर्स प्रदेश में वोकशनल ट्रेनिंग के क्षेत्र में एक नई शुरुआत है। यह कोर्स विद्यार्थियों के साथ साथ प्रोफेशनल्स के लिए भी लाभदायक सिद्ध होगा और भविष्य में उनके कैरियर ग्रोथ में सहायक रहेगा। उन्होंने कहा कि इस विषय में महारथी विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को ट्रेनिंग दी जाएगी।

इस अवसर पर सीएसआईआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एससी बोस ने कहा कि मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया के उद्देश्य को लेकर इस तरह के कोर्स की अवधारणा रखी गयी है। उन्होंने बताया कि सीएसआईआर-सीरी द्वारा आईओटी की तरह ही सेन्सर्स, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्लैक्सिबल इलैक्ट्रोनिक्स, साइबर फिजिकल सिस्टम्स जैसी तकनीकों पर आधारित ट्रेनिंग भी दी जाती है।

सीएसआईआर में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. कोटा सोलोमन राजू ने कोर्स के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल्द ही वह समय आने वाला है, जब इंटरनेट ऑफ थिंग्स का उपयोग हम अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी में करेंगे। उन्होंने कहा कि यह तकनीक वास्तव में ऎसे स्मार्ट डिवाइस हैं, जो आपस में डेटा सैंड करते हैं और हमारे जीवन को आसान बनाते हैं। हम जहां भी रहें ये डिवाइस हमारे कॉन्टेक्ट में रहेंगी। उदाहरण के लिए यदि एसी खराब होने वाला हो, तो पहले ही हमें सम्पर्क करके बता दे कि परेशानी आने वाली है।

सीएसआईआर-सीरी के जयपुर सेन्टर के अध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रामप्रकाश ने कोर्स के उद्देश्यों और कन्टेन्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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