जन निगरानी अभियान के दूसरे दिन महिलाओं ने उठाए अपने मुद्दे

मज़दूर हैं, मजबूर नहीं
महिलाओं के लिए सरकार ने योजनाएँ तो बनाईं, लेकिनज़मीन पर नहीं उतरी – कविता श्रीवास्तव

फ़िरोज़ खान
जयपुर, 16 अक्टूबर । जन निगरानी अभियान के दूसरे दिन शहीद स्मारकपर मंगलवार को महिलाओं ने अपने मुद्दों को उठाया और राजनीतिक पार्टियों सेउनकी माँगों को उनके घोषणा पत्र में शामिल किया जाए। आज अभियान मेंशामिल हुयी राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष लाड कुमारी जैन ने सरकार कोसौंपी गयी राज्य महिला नीति पर कुछ क़दम ना उठाने का विरोध किया। इसकेअलावा महिला पुनर्वास और इनकी नीतियों की ठीक से पालना करने की बात भीकही। महिलाओं को ठेके पर काम करने की प्रथा, सभी महिलाओं (मज़दूरमहिलाओं समेत) को मेटरनिटी लीव, फ़ैमिली कोर्ट, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट, परित्यकतापेन्शन देने जैसी माँगों को पार्टियाँ से अपने घोषणा पत्र में शामिल करने की माँगकी। सभा में आयी बेघर औरतों ने अपने लिए घर, शौचालय और मायक़े याससुराल की सम्पत्ति में हक़ देने की माँग को उठाया।
जयपुर में सखा कैब की ड्राइवर सुनीता ने कहा कि अब लो-फ़्लोर बसों में भीमहिला ड्राइवर होनी चाहिए और महिलाओं के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को सरलबनाया जाए।
अभियान में मुस्लिम समाज की महिलाओं ने भी हिस्सा लिया और अपनी माँगेरखी। नैशनल मुस्लिम महिला कल्याण सोसाइटी की निसात हुसैन ने मुस्लिममहिलाओं के लिए रोज़गार, सरकारी योजनाओं में लाभ, भीड़तंत्र पर रोक, मुस्लिममहिलाओं पर हो रहे अत्याचारों पर रोक, मुसलमान क्षेत्रों में साफ़ सफ़ाई को दुरुस्तकरने की माँगें उठाई। साथ ही सभा में राजस्थान भर से आयी आदिवासीमहिलाओं ने ने अपने हक़ हुक़ूक़ और माँगों को राजनीतिक पार्टियों से उनकेघोषणा पत्र में शामिल करने की माँग की।

मंगलवार को निम्न प्रस्ताव पारित हुए
सभी राजनीतिक दलों से महिलाओं को 33% टिकट देने की माँग की गयी।
काम करने वाली महिलाओं को श्रमिक माना जाए।
ड़ायन प्रथा के क़ानून को सख़्ती से लागू किया जाए।
कार्य स्थान पर यौन हिंसा निवारण क़ानून में समितियाँ बने और उनकी निगरानीहो।
बलात्कार पीड़ितों के साथ व्यवहार को लेकर डॉक्टर और पुलिस को ट्रेनिंग दीजाए।
शराब की वजह से महिलाएँ हिंसा की शिकार होती हैं इसलिए पूरे प्रदेश में शराबबंदी की जाए।
खाप पंचयों के ख़िलाफ़ सख़्त क़ानून हो।
घरेलू कामगार महिलाओं को पेशेवर पहचान मिले।
ओनर किलिंग के मामलों पर तुरंत क़ार्रवाई हो और सख़्त सज़ा का प्रावधान कियाजाए। अंतर जातीय और अंतर धार्मिक विवाह करने वाले जोड़ो को सुरक्षा एवं आवास दिया जाए।

इसलिए ज़रूरी हैं महिलों के मुद्दे क्योंकि
राजस्थान में 200 विधायकों में से सिर्फ़ 27 महिला विधायक हैं जबकि महिलाओंकी आबादी लगभग साढे तीन करोड़ है।
राजस्थान में संसद में लोकसभा या राज्यसभा से कोई महिला नहीं है।
पंचायत चुनावों में 8वी पास होने ज़रूरी होने से ग्रामीण महिलाओं का प्रतिनिधित्वकम हुआ है।
राजस्थान में आज भी महिलाओं को ड़ायन बता कर सताया जा रहा है। 2015 सेअब तक 50 महिलाओं को ड़ायन बताया जा चुका है।
बुधवार को अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के मुद्दों पर चर्चा होगी और राजनीतिकदलों से उन्हें उनके घोषणा पत्रों में शामिल करने की माँग की जाएगी।

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