24 को बाबा शेवाराम साहिब का ’प्राकट्य महोत्सव’

विशेष स्तुति, ध्यान-पूजन, सत्संग-प्रवचन सहित होगा श्री रामचरित मानस का अखण्ड पाठ

हरी शेवा उदासीन आश्रम, सनातन मंदिर, भीलवाड़ा के आराध्य परम पूजनीय सतगुरू श्री 108 बाबा शेवाराम साहिब जी का 102 वार्षिक ’प्राकट्य महोत्सव’, दिनांक 24 अक्टूबर, 2018 बुधवार शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर बड़े धूम-धाम से मनाया जायेगा। इस अवसर पर भारत वर्ष से श्री महंत, साधु, संत-महात्मा पधारेगें एवं देश-विदेश से श्रद्धालुगण जन्मोत्सव में सम्मिलित होगें। कार्यक्रम में 23 अक्टूबर मंगलवार को श्री रामचरित मानस का अखण्ड पाठ साहब प्रारम्भ होगा। 24 अक्टूबर बुधवार शरद पूर्णिमा को सुबह 5 से 6 तक गुरूओं की समाधि साहब पर पूजन अर्चन और ध्यान होगा। सुबह 8 बजे हवन यज्ञ, सुबह 9 बजे से नितनेम, संतो-महापुरूषों के प्रवचन-सत्संग, श्री रामचरित मानस के अखण्ड पाठ साहब का भोग पड़ेगा। महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन, संत मयाराम, संत राजाराम व सर्व संत मण्डली द्वारा गुरूओं का गुणगान करते हुए सत्संग प्रवचन होगा। 102 वार्षिक प्राकट्य महोत्सव के उपलक्ष में लड्डू महाप्रसाद का भोग लगेगा। संतो-महापुरूषों का भण्डारा व आम भण्डारा होगा। सांय 5 बजे से धर्मध्वजा वंदन, झण्डा साहब चढ़ेगा। तत्पश्चात् संतो-महात्माओं के सत्संग प्रवचन, भजन कीर्तन सहित समाधि साहब पर चादर चढ़ेगी एवं उत्सव विश्राम-पल्लव कार्यक्रम होगा।
संत मयाराम ने बताया कि इस जन्मोेत्सव में अखिल भारतीय सिन्धू सन्त समाज ट्रस्ट के पदाधिकारी- महंत स्वामी संतोषदास जी (इन्दौर), महंत स्वामी आत्मदास जी उदासी (उज्जैन), महंत स्वामी स्वरूपदास जी (अजमेर), पंचमुखी दरबार भीलवाड़ा के महंत लक्ष्मणदास जी त्यागी, महंत बाबूगिरी जी (भीलवाड़ा) स्वामी गणेशदास जी (भीलवाड़ा) स्वामी मोहनदास जी (भोपाल), महंत श्यामदास जी (किशनगढ़), स्वामी दर्शनदास जी (गांधीधाम), सांई लक्खी गोस्वामी जी (भोपाल), महंत रामदास जी (अजमेर), स्वामी ईश्वरदास जी (अजमेर) महंत हनुमानराम जी (पुष्कर) एवं उदासीन अखाड़ा के साधु-संत व निर्वाण मण्डल सहित भारतवर्ष से कई विद्वान गुणीजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनन्द देने वाले सिंधी भगत इस समारोह में शामिल होगें। महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने सभी से सतगंुरू बाबा शेवाराम साहब जी के वार्षिक प्राकट्य महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों सहित अखण्ड पाठ साहब, सत्संग, कीर्तन एवं प्रवचनों का लाभ उठाने को कहा।

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