‘महिलाओं के लिए पशुपालन में उद्यमिता विकास की संभावनाएं’ विषयक कार्यशाला सम्पन्न

बीकानेर, 17 जनवरी। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान केन्द्र में ‘महिलाओं के लिए पशुपालन में उद्यमिता विकास की संभावनाएं’ विषयक दो दिवसीय कार्यशाला गुरुवार को सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर निदेशक (अनुसंधान) डाॅ. एस. एल. गोदारा ने कहा कि आज महिलाएं पशुपालन में जुटी हैं, लेकिन दूध अथवा अन्य उत्पादों की मार्केटिंग के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका नगण्य है। इसके लिए ग्राम स्तर पर समूहों का गठन करते हुए इन महिलाओं को इस दिशा में प्रशिक्षित करना होगा। उपनिदेश कृषि (विस्तार) डाॅ. उदयभान ने कहा कि बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में पशुपालन की अपार संभावनाएं हैं। इसमें महिलाओं की भूमिका बढ़ जाए तो परिवार की आय बढ़ेगी और वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा।
डाॅ. पी. एस. शेखावत ने कहा कि पशुपालन, कृषि की रीढ है। दोनों एक-दूसरे के पूरक है। यदि खेतीहर महिलाएं इस दिशा में नवाचार कर सकें तो इसके सुनहरे परिणाम आएंगे। प्रशिक्षण की मुख्य अन्वेषक डाॅ. चित्रा हैनरी ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्राप्त इस प्रोजेक्ट के तहत एक रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को प्रस्तुत करनी है। इस प्रोजेक्ट के तहत बीकानेर और उदयपुर के 540 गांवों में 10 हजार से अधिक लोगों का सर्वे किया गया है। इसी श्रृंखला में जिला स्तर पर दो तथा राज्य स्तर पर एक कार्यशाला प्रस्तावित है।
सहायक प्रभारी डाॅ सीमा त्यागी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट पूर्णतया सर्वे बेस है। मार्च 2019 तक इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने आरकेवीवाई के विभिन्न प्रोजेक्ट्स के बारे में बताया। सहप्रभारी डाॅ. यू. के. मील ने बताया कि दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान सरकारी एवं गैर सरकारी विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने विभिन्न विषयों पर प्रकाश डाला। सर्वे कार्य में अमित कुमार, देवेन्द्र पूनिया और सुभाष ने भागीदारी निभाई।

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