बाड़मेर, 31 अगस्त 2020 : राजस्थान के बाड़मेर जिले में क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की खोज के बाद से यह क्षेत्र सुर्खियों में छाया हुआ है। इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ गई हैं और इससे बिजनेस के ढ़ेरों अवसर उपलब्ध हुये हैं। डेयरी कारोबार से जुड़े किसानों ने भी इस विकास को एक मौके की तरह लिया है और वे दुग्ध उत्पादन को आमदनी का एक मजबूत एवं टिकाऊ साधन बना रहे हैं। इसके साथ ही वे स्थानीय समुदाय की जरूरतों को भी पूरा कर रहे हैं।
हालांकि, देश और पूरी दुनिया में जारी मौजूदा कोविड-19 संकट ने सभी क्षेत्रों को समान रूप से प्रभावित किया है और इससे किसान भी अछूते नहीं रहे। कृषि उद्योग को मजदूरों का अभाव और आपूर्ति-श्रृंखला/लॉजिस्टिक्स में बाधा जैसी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। राजस्थान के बाड़मेर जिले के डेयरी किसानों को भी ऐसे ही हालातों से गुजरना पड़ा। लॉकडाऊन के कारण इस महामारी में उनकी आमदनी का एक स्रोत बंद हो गया। इन हालातों में निजी क्षेत्र में भारत की सबसे बड़ी ऑयल एंड गैस एक्सप्लोरेशन एवं प्रोडक्शन कंपनी केयर्न ऑयल एंड गैस, वेदांता लिमिटेड ने ‘डेयरी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट-मरू सागर’ की शुरूआत की। इसका उद्देश्य मौजूदा मानवीय संकट के दौरान किसानों को उनके व्यवसाय को सुधारने में मदद करना है।
बाड़मेर में डेयरी किसानों के लिये केयर्न ने 2007 में विभिन्न पहलें शुरू की थी, जिसका उद्देश्य कोऑपरेटिव्स के लिये खरीदी को बढ़ाकर किसानों की आजीविका को बेहतर बनाना था। प्रोजेक्ट की मदद से बाड़मेर में आमदनी बढ़ाने और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाने के लिये काम किये जाते हैं। इसकी शुरूआत गुडामलानी में 140 किसानों के साथ दो गांवों में हुई थी। इसमें 4500 पंजीकृत किसान थे और साथ 14 बल्क मिल्क कूलर्स के साथ 46 मिल्क कलेक्शन सेंटर्स भी थे, जिनकी स्थापना दूध का उत्पादन बढ़ाकर 17,500 लीटर प्रति दिन करने के लिए की गई थी। इससे किसानों को बेहतर मुनाफा मिला, प्रशिक्षण एवं वेटरनरी केयर के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिली। यह प्रोजेक्ट साझा मूल्य निर्माण करने और स्थानीय समुदायों की बेहतरी एवं उनकी जिंदगी को सुधारने की दिशा में केयर्न की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुये, हनुमान चौधरी, प्रोग्राम कॉर्डिनेटर, श्योर (सोसायटी टु अपलिफ्ट रूरल इकोनॉमी) ने कहा, ”केयर्न वेदांता फाउंडेशन और श्योर बाड़मेर का डेयरी डेवलपमेंट एवं एनिमल हस्बेंडरी प्रोजेक्ट क्षेत्र में ग्रामीण डेयरी किसानों के लिये एक वरदान साबित हुआ है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत, प्रतिदिन 6 गांवों से 16,250 लीटर दूध इकट्ठा किया जाता है, उनकी गुणवत्ता एवं शुद्धता की जांच की जाती है और फिर सरकार द्वारा चलाई जा रही डेयरियों में उन्हें भेजा जाता है। इसके अतिरिक्त, किसानों को पशुओं के चारे को बेहतर बनाने और उनकी सेहत से जुड़ी बातों की जानकारी दी जाती है। उन्हें लाभ पहुंचाने के लिये एक फ्री मोबाइल वेटेरनरी हेल्थ वैन भी चलाई जाती है। इस प्रोजेक्ट ने आर्थिक समृद्धि और स्थायी आमदनी का एक स्रोत उत्पन्न कर थार में डेयरी किसानों की जिंदगी पूरी तरह से बदल कर रख दी है।
इस प्रोजेक्ट से अभी तक बाड़मेर के लोगों को फायदा ही हुआ है, क्योंकि दूध एकत्र करने की नियमित गतिविधियां 46 गांवों में की गईं, जिससे कुल 2.7 करोड़ लीटर दूध की बिक्री हुई और 82 करोड़ रूपये का राजस्व मिला। इस साल प्रोजेक्ट के अंतर्गत स्थापित एमवीवी और वन-स्टॉप सॉल्युशन शॉप से 1,318 पशुओं और 82 परिवारों को लाभ हुआ। इस प्रोजेक्ट के तहत, सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स ने महामारी के दौरान 11,500 रूपयों की बचत की। गौरतलब है कि इस महामारी ने कृषि संबंधित गतिविधियों को बुरी तरह से प्रभावित किया है।