कांग्रेस पार्टी के युवा नेता आजाद सिंह राठौड़ ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कृषि संबंधित विवादस्पद तीनों विधेयकों को वापस लेने की मांग की एवं 8 दिसम्बर को किसानों द्वारा आयोजित भारत बंद को अपना समर्थन दिया।
राठौड़ ने बताया की संसद के गत सत्र में पारित कृषि संबंधित तीन विधेयकों को वापिस लेने के लिए देश के किसान संघर्षित है। इन तीन विवादास्पद विधेयकों का देशभर के किसान भारी विरोध कर रहे है तथा पिछले छ: माह से इसे वापिस लेने के लिए जगह-जगह आंदोलन कर रहे है। लेकिन केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसानों की कोई बात सुनने को तैयार नहीं है। “उल्टा चोर कौतवाल को डांटे” वाली कहावत को चरितार्थ करते नजर आ रही है। ऐसा देखने को मिल रहा है की किसानों को देशद्रोही और राजनीतिक पार्टियों के एजेंट बता रहे है।
राठौड़ ने कहा की देश के अन्नदाता का इस तरह का अपमान आज तक कभी देखने को नहीं मिला है। देश के 80 फीसदी किसान छोटे या मध्यम वर्ग के हैं। इसलिए एक भारत-एक बाजार का नारा उनके लिए काम नहीं करता। देश के किसानों की अनेक समस्याएं है तथा भूमि अधिग्रहण में कानून में बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा किसानों को देने का प्रावधान होते हुए भी सरकार अधिग्रहित भूमि के बदले में नाममात्र का मुआवजा किसानों को देती है।
राठौड़ ने कहा की भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसानों की आय को दुगुना करने के वादे कर सत्ता में आई है। लेकिन सच्चाई यह है कि किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। ऊपर से यह सरकार नित नये-नये बहानों के साथ अनावश्क अनाप-सनाप कृषि जिन्सों को आयात करके तथा देश की खपत से अधिक उत्पादन के बावजूद निर्यात पर प्रतिबन्ध लगाकर कृषि जिन्सों की कीमतें गिराने में लगी रहती है।
राठौड़ ने कहा की स्वामीनाथन रिपोर्ट को भी लागू करने में लिलापोति, दिखावा एवं छालावा किसानों के साथ किया गया है। इनके झूठे वादों एवं आसमानी सपनों की वजह से देश के अन्नदाता किसान अब आत्महत्या करने को मजबूर है। आय दुगुनी होने के बजाय किसान गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर है। किसानों की इस बदहाली पर मोदी जी ने एक बार भी ना ही चिन्ता जाहीर की और ना ही किसानों के मन की बात को जाना और ना ही किसानों के साथ संवाद किया। मोदी जी अब भी ईधर-ऊधर की बात करते नजर आ रहे है।
किसानों ने विभिन्न माध्यमों से अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने की कोशीश की, लेकिन उनकी आवाज को हर बार दबाया गया। मजबूर किसान परेशान होकर देश के विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में कूच कर दिल्ली में सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करने के लिए आ रहे थे, केंद्र सरकार ने तानाशाहीपूर्ण सड़के रोककर किसानों पर लाठीचार्ज कर, आंसूगोलो से, ठण्डे पानी की बौछार जैसे अन्यायपूर्ण और अशिष्टतापूर्वक तरीक़ों से किसानों पर अत्याचार किये और किसानों को दिल्ली में प्रर्दशन करने से रोका गया। उनकी लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने के अधिकारो को दबाया गया।
राठौड़ ने कहा की सूट-बूट वाली केंद्र की भाजपा सरकार ने ये कृषि संबंधित विवादास्पद अधिनियम कॉर्पोरेट के हित में उनकी सलाह पर बनाये है। किसानों से इसको लेकर किसी प्रकार की कोई राय नहीं ली गई। सुमचित विचार के लिए कमेटी को भी नहीं भिजवाया गया तथा संसद में बिना किसी बहस के पारित कर दिये।
राठौड़ ने कहा कि देश के सबसे बड़े वर्ग किसानों की मर्जी के विरुद्ध भाजपा सरकार इन अधिनियमों को वापिस नहीं लेने की हठधर्मिता अपनाये हुए है। देश की सबसे ईमानदार व स्वाभीमानी कौम किसानों को बदनाम करने में लगी है।
राठौड़ ने राष्ट्रपति जी से अनुरोध किया है कि आप केंद्र सरकार से हठधर्मिता को छोड़ने, बिना किसी विलम्ब के किसानों की इस जायज और न्यायपूर्वक मांगों को माने और इन कॉर्पोरेट के हितों के लिए बनाये गये इस विवादास्पद व देश का भविष्य अंधकारमय करने वाले इन कृषि अधिनियम को वापस लें। साथ ही आमजन से अपील की है कि कल 8 दिसम्बर को किसानों द्वारा आयोजित भारत बंद का समर्थन कर किसानों की आवाज को मजबूत करें। जिससे इस तानाशाह सरकार पर दबाव बन सके।
– गिरधर सिंह ( कार्यालय : श्री आज़ाद सिंह राठौड़, बाड़मेर )
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