वर्ष 2021-22 का आम बजट सोमवार को संसद में वित्तमंत्री निर्माला सीतारमण ने पेश किया। इस बार भी बजट में बाड़मेर को लेकर कोई विशेष घोषणा नहीं की गई। बड़ी घोषणा या राहत पैकेज को लेकर बजट में कुछ खास नजर नहीं आया, गरीब और किसान विरोधी, दिशाहीन और निराशाजनक बजट है, यह बात मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के युवा नेता आजाद सिंह राठौड़ ने कही।
राठौड़ ने बताया कि बाड़मेर-जैसलमेर ख़ाली हाथ ही रहा, जैसे कि केंद्र सरकार के मानचित्र पर ही ना हो। सीमा क्षेत्र विकास बजट में भी भारी कटोती की गयी है। जिसका सबसे ज़्यादा व्यय राजस्थान में होता था। इससे राजस्थान के सीमा क्षेत्र के विकास में बड़ी रुकावट होगी।
राठौड़ ने बताया की कोरोना महामारी से पैदा हुई विकट बेरोजगारी की समस्या को दूर करने, आर्थिक संकट का सामना कर रहे मध्यम वर्ग के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं। मध्यम वर्ग करदाताओं को उम्मीद थी कि मोदी सरकार इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव कर कोई राहत देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 75 वर्ष से ज्यादा उम्र वालों को आयकर नहीं भरने की सरकार ने घोषणा की है, इस उम्र में न के बराबर लोग है, और इनकी कोई कमाई भी नहीं है, यह कोई राहत नहीं, आमजन की भावनाओं के साथ क्रूर मजाक है। आम आदमी के लिए कुछ विशेष नहीं है, इस बजट में। इस बजट से समाज का हर तबका पूरी तरह से निराश हुआ है।
राठौड़ ने बताया की किसानों की आय को दुगुना करने के सपने दिखाकर सत्ता में आई भाजपा सरकार ने खेती का बजट पहले की तुलना में घटा दिया है। अब खेती का बजट 1.42 लाख करोड़ से घटाकर 1.31 लाख करोड़ कर दिया गया है। कृषि अनुसंधान लगातार बजट की कमी से जूझ रहा है, उस दिशा में भी कोई ठोस पहल नहीं हुई है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए इस बजट में कोई स्पष्ट उपाय नहीं है, जो की चुनाव के समय किसानों से किये गये भाजपा के खोखले चुनावी वादों की पोल खोलता है।
राठौड़ ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद मोदी सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ाती जा रही है। आमजन को उम्मीद थी कि बजट में केंद्रीय करों में कटौती कर मोदी सरकार राहत प्रदान करेगी लेकिन बजट में एक नया सेस लगा दिया गया है। फिलहाल इसका सीधा असर आम आदमी पर ना पड़े लेकिन आखिर में इसका बोझ आमजन को ही उठाना पड़ेगा।
राठौड़ ने बताया कि बड़ी मात्रा में सरकारी कम्पनियों को बेचने से अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचने के संकेत है। बेचने से बेहतर है सरकार इन सार्वजनिक कम्पनियों में प्रशासनिक सुधार करें, बेच देना हर मुश्किल का हल नहीं होता है।
किसी भी राष्ट्र के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है, वर्तमान में रक्षा बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस समय भारत की सुरक्षा के सन्दर्भ स्थिति सही नहीं है, ऐसे में रक्षा बजट पर ध्यान न देना एक बड़ी लापरवाही है। क्योंकि चीन और पाकिस्तान में हर वर्ष रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की जाती है।
राठौड़ ने बताया की किसी भी राष्ट्र के लिए किसी भी क्षेत्र में FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) 49 % से अधिक नहीं होना चाहिए। मोदी सरकार ने बीमा सेक्टर में 74 % FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) को मंजूरी दी है, जो की सरासर गलत है। इससे हमारी घरेलु कम्पनियां बुरी तरह से प्रभावित होगी।
– गिरधर सिंह ( कार्यालय : श्री आज़ाद सिंह राठौड़, बाड़मेर )
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