गहलोत केंद्र पर भड़के, बोले – पेट्रोल – डीजल की कीमतों के लिए मोदी सरकार दोषी

विशेष संवाददाता / जयपुर। पूरे देश में पेट्रोल – डीजल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 11 दिनों से लगातार दाम बहुत तेजी से बढ़े। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भड़के हुए हैं। उनकी नाराजगी की वजह यह भी है कि पेट्रोल – डीजल की बढ़ती कीमतों के लिए बेवजह राज्य सरकारो को, राजस्थान में खासकर गहलोत सरकार को दोषी बताया जा रहा है। जबकि राजस्थान से ज्यादा महंगा पेट्रोल – डीजल तो मध्य प्रदेश में बिक रहा है, जहां बीजेपी की सरकार है। गहलोत का कहना है कि पेट्रोल – डीजल की कीमतों का बढ़ना मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों का नतीजा है। मुख्यमंत्री गहलोत मानते हैं कि केंद्र सरकार एक तो राज्यों को उनके राजस्व का हिस्सा नहीं दे रही है, उल्टे मनमोहन सिंह की सरकार के मुकाबले कई गुना ज्यादा ड्यूटी भी कई गुना बढ़ा दी है, इसी वजह से ये कीमतें बढ़ रही है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने जनता में फैलाए जा रहे भ्रम को स्पष्ट करते हुए ट्वीटर व फेसबुक पर कहा है कि मोदी सरकार ने राज्यों के हिस्से वाली बेसिक एक्साइज ड्यूटी को लगातार घटाया है और अपना खजाना भरने के लिए केवल केन्द्र के हिस्से वाली एडिशनल एक्साइज ड्यूटी एवं स्पेशल एक्साइज ड्यूटी को लगातार बढ़ाया है। इससे अपने आर्थिक संसाधन जुटाने के लिए राज्य सरकारों को वैट बढ़ाना पड़ रहा है।सोशल मीडिया के विभिन्न स्रोतों पर मुख्यमंत्री गहलोत ने यह जानकारी साझा करते हुए कहा है कि कोरोना में बरबाद हुई अर्थव्यवस्था के कारण राजस्थान के आर्थिक हालात पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है एवं इसी वजह से राज्य का राजस्व घट गया है। लेकिन आमजन को राहत देने के लिए राजस्थान सरकार ने पिछले महीने ही वैट में 2 प्रतिशत की कटौती की है। मुख्यमं6 ने कहा है कि इसके उलट मोदी सरकार जनता को ऐसी कोई राहत देने की बजाय पेट्रोल-डीजल की कीमतें रोज बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री गहलोत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि राजस्थान सरकार को बदनाम करने की नीयत से यह अफवाह फैलाई जा रही हैं कि राजस्थान सरकार पेट्रोल पर सबसे अधिक टैक्स लगाती है, इसलिए यहां कीमतें ज्यादा हैं। जबकि भाजपा शासित मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर राजस्थान से ज्यादा टैक्स लगता है, इसीलिए भोपाल के मुकाबले जयपुर में पेट्रोल की दर कम है।
पिछले 11 दिनों से लगातार दाम बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसकी वास्तविक तस्वीर बताते हुए कहा है कि मोदी सरकार पेट्रोल पर 32.90 रुपये एवं डीजल पर 31.80 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगाती है। जबकि 2014 में मनमोहन सिंह की सरकार के समय पेट्रोल पर सिर्फ 9.20 रुपये एवं डीजल पर महज 3.46 रुपये एक्साइज ड्यूटी थी। मोदी सरकार ने मनमोहन सिंह की सरकार के मुकाबले डीजल पर नौ गुना और पेट्रोल पर साढ़े तीन गुना ड्यूटी बढ़ा दी है। गहलोत का कहना है कि इस बढ़ी हुई ड्यूटी को आमजन के हित में अविलंब एक्साइज ड्यूटी घटानी चाहिए, ताकि कोरोनाकाल में लंबे लॉकडाउन से खराब आर्थिक हालात भुगत रहे लोगों को राहत मिल सके। मुख्यमंत्री गहलोत की राय में मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियां ही इस बढ़ोतरी का असली कारण है। मुख्यमंत्री के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल मनमोहन सिंह की सरकार के वक्त के मुकाबले लगभग आधी के आसपास हैं। लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। मुख्य़मंत्री गहलोत इसीलिए सख्त नाराज हैं। (प्राइम टाइम)

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