आज़ाद सिंह राठौड़ डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित

कांग्रेस के युवा नेता और कारगिल द हाइट्स ऑफ़ ब्रेवरी व बलोचिस्तान द हाइट्स ऑफ़ अप्रेशन जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक आज़ाद सिंह राठौड़ को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। राठौड़ को यह सम्मान गुरुग्राम स्थित वाणिज्य मंत्रालय के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपोरेट अफेयर्स परिसर में इंटरनेशनल इंटर्न्शिप यूनिवर्सिटी (आई॰आई॰यू॰) द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में दिया गया। आज़ाद सिंह को डॉक्टरेट की यह मानद उपाधि उनके अंतरराष्ट्रीय मामलों, सैन्य व विदेश नीति पर किये गये उनके रचनात्मक लेखन कार्य के लिये दी गई है। राठौड़ के बलोचिस्तान व बलोच लोगों के इतिहास, पाकिस्तान से उनके संघर्ष, उन पर हो रहे अत्याचार व मानवाधिकार हनन पर प्रकाशित शोध पत्रों को काफ़ी सराहा गया है। उनका लेखन शोध की नई संभावनाओं और दिशाओं वाला है। राठौड़ को इस सम्मान मिलने की सूचना पर उनके परिचितों, मित्रों और राजस्थान में उनके गृह नगर बाड़मेर में समर्थकों में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी व बधाइयाँ मिलने का सिलसिला शुरू हो गया।

इस अवसर उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय मामलो के विशेषज्ञों, बलोच संगठनों व मानवाधिकार संगठनों से जुड़े सदस्यों ने भी बधाई व शुभकामनाएँ दी। राठौड़ को मानद उपाधि देने वाली आई॰आई॰यू॰ विश्व शिक्षा संगठन और अंतर्राष्ट्रीय प्रत्यायन संगठन से मान्यता प्राप्त है । यह संस्थान दुनिया के कई शीर्ष विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ संबद्ध है। राठौड़ ने इस सम्मान कार्यक्रम में अपने शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए करते हुए बताया कि बलोचिस्तान व बलोच विषय पर उन्होंने 4 वर्ष तक शोध के उपरांत कई आलेख लिखे और यह पुस्तक पूर्ण की है। उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ी के भारतीय भाग्यशाली है जिन्होंने एक स्वतंत्र देश में जन्म लिया है। भारत मानवाधिकारों का सम्मान करता है और एक निष्पक्ष संविधान द्वारा शासित है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नागरिक के रूप में हमने अपने संविधान से सीखा है कि हमें हर उस चीज के खिलाफ खड़ा होना चाहिए जो असंवैधानिक, अनैतिक, अन्यायपूर्ण और असमान हो।

एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में, मैं अपने आसपास हो रहे अन्याय और असंवैधानिक मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाने की पूरी कोशिश करता हूँ। मैं कतार में खड़े आखिरी आदमी को न्याय मिलने तक अपनी आवाज उठाना अपना कर्तव्य मानता हूँ, ठीक इसी तरह से इस दुनिया के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विश्व के हर कोने में दर्द और दुख में जी रहे लोगों के प्रति भी हमारी ज़िम्मेदारी बनती हैं।

इस पुस्तक व शोध पत्र के माध्यम से, मैं बलूच लोगों के प्रति अपनी संवेदनशीलता व्यक्त करने का प्रयास कर रहा हूं, जो मेरे गृहनगर से लगभग 350 किलोमीटर दूर हैं, हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान के दमन और दमन के तहत दर्दनाक परिस्थितियों में रह रहे हैं। राठौड़ ने बताया कि वह बलोचिस्तान क्षेत्र व वहाँ रह रहे लोगों पर पाकिस्तान की सरकार व फ़ौज की दमनकारी नितियों को उजागर करने व बलोच लोगों के निरंतर सात दशकों से चले आ रहे संघर्ष को विश्व के सामने लाने के प्रयास करते रहेंगे। उन्हें मिले इस सम्मान से उनके इन प्रयासों को और अधिक सफलता और बढ़ावा मिलेगा। राठौड़ अंतरराष्ट्रीय व रक्षा मामलों के अधिकारी विशेषज्ञ के रूप में विभिन्न समाचार पत्रों में निरंतर आलेख लिखते रहे हैं।
– देवेंद्र जोशी ( कार्यालय – श्री आज़ाद सिंह राठौड़, बाड़मेर )
+91-9828148888

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