*सुपार्श्वनाथ पार्क में दशलक्षण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की आराधना*
भीलवाड़ा,15 सितम्बर। आचार्य श्री सुंदरसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री महावीर दिगम्बर जैन सेवा समिति के तत्वावधान में दसलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना शहर के शास्त्रीनगर हाउसिंग बोर्ड स्थित सुपार्श्वनाथ पार्क में आठवें दिन भी श्रद्धा व भक्तिभावना के साथ जारी रही। दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की आराधना की गई। प्रवचन में मुनि सुगमसागर महाराज ने कहा कि आत्मशांति के लिए राग द्धेष ओर विकारी भावों का त्याग करना ही उत्तम त्याग धर्म है। कृतज्ञता के भाव से किए त्याग से मन पवित्र होता है व जीवन सफल होता है। उत्कृष्ट कार्यो के लिए बुरी आदतों का त्याग ही धर्म है। त्याग अच्छी वस्तु का नहीं बल्कि बुरी वस्तु का ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि राग द्धेष, क्रोध,मान आदि विकार भावों का आत्मा से छूट जाना ही व खुश रहना ही त्याग धर्म है। भोगो से मोह छोड़कर दान करना स्व ओर पर के लिए त्याग धर्म को स्वीकार करना है। मुनिश्री ने कहा कि पर द्रव्यों से मोह छोड़ उनका त्याग करना ही इस धर्म की आराधना है। उत्तम कार्यो के लिए करें दान, त्यागे बुरी आदते उत्तम त्याग धर्म है। जो वस्तु अपनी होती है उसी का दान किया जाता है। त्याग धर्म आसक्ति छोड़ने का नाम है। वस्तु को छोड़ना इतना महत्वपूर्ण नहीं, जितना उस वस्तु के प्रति जो मोह या मुर्च्छा के भाव थे उन्हें छोड़ना महत्वपूर्ण है। श्री महावीर दिगम्बर जैन सेवा समिति के अध्यक्ष राकेश पाटनी ने बताया कि दशलक्षण पर्व के आठवें दिन सुपार्श्वनाथ मंदिर में मुख्य शांतिधारा व आरती का सौभाग्य प्रकाश, कैलाश, अरविन्द,रोशन,पारस,सम्यक, काव्य शाह परिवार ने लिया। सौधर्मेन्द्र का इन्द्र व आरती का सौभाग्य कमलादेवी,राजकुमार,मधुलिका, दिलीप, अंजलि, अक्षत गदिया परिवार को प्राप्त हुआ। मीडिया प्रभारी भागचंद पाटनी ने बताया कि आचार्य सुंदरसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में उत्तम त्याग धर्म की आराधना एवं पूजा अर्चना मय भक्ति संगीत के साथ संगीतकार हर्ष भोपाल एवं पंडित पदमचंद काला के निर्देशन में कराई गई जिसका कई श्रावक-श्राविकाओं ने लाभ लिया। पूजा के पूर्व श्रीजी को जुलूस के साथ श्रद्धालुओं द्वारा पांडाल में ले जाया गया। दिव्य तपस्वी राष्ट्रीय संत आचार्य सुंदरसागरजी महाराज के 10 उपवास की साधना चल रही है। इस उपलक्ष्य में शाम को सभी उपवास रखने वाले तपस्वियों एवं आचार्यश्री साधना हेतु सभी त्यागी वृतियों की अनुमोदना के लिए विनतियों का कार्यक्रम हुआ। दशलक्षण पर्व के नवें दिन उत्तम अकिंचन धर्म की आराधना होगी। इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5 बजे ध्यान, सुबह 6.15 बजे नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा, सुबह 7.30 बजे से श्रीजी का पांडाल में आगमन, सुबह 7.45 बजे से संगीतमय पूजन एवं मंगल प्रवचन हो रहे है। आहारचर्या के बाद दोपहर 2 बजे से तत्वार्थसूत्र पूजन,सरस्वती पूजन व तत्वार्थ सूत्र वाचन किया जा रहा है। शाम 6 बजे से प्रतिक्रमण एवं सामायिक, शाम 7.15 बजे से श्रीजी की आरती एवं शाम 7.40 बजे से आचार्यश्री की भक्तिमय आरती की जा रही है। इसी चातुर्मास की श्रणखला मै पिछली रात सुपार्शनाथ जाग्रति मंच द्वारा एक भव्य कवि सम्मेलन किया जिसमे मुकेश मनमौजी अनिल जैन दिव्य कमल जी
शालू जैन ने हिस्सा लिया हज़ारो धर्म प्रेमियों ने भाग लिया कार्य क्रम की अध्यक्षता राकेश पाटनी नें की
*भागचंद पाटनी*
मीडिया प्रभारी
मो.9829541515