कविता व्यक्ति के अंतरंग की स्वतःस्फूर्त अभिव्यक्ति- दामोदर खड़से

कवियत्री मनोरमा शर्मा “मनोरम” के काव्य संग्रह ‘स्वप्न के आलोक’ के विमोचन

जयपुर । (अशोक लोढ़ा) प्रसिद्ध हिन्दी कवि व लेखक़ दामोदर खडसे ने कहा कि यदि समाज में कोई निष्पक्ष है तो वह है साहित्य और साहित्य में भी निष्पक्ष है तो वह है कविता। उन्होंने कहा कि कविता व्यक्ति के अंतरंग की स्वतःस्फूर्त अभिव्यक्ति है। खड़से आज राज्य की जानी मानी कवियत्री मनोरमा शर्मा “मनोरम” के काव्य संग्रह ‘स्वप्न के आलोक’ के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मनोरमा जी ने सपनों और सच्चाई के बीच एक सेतु के रूप में अपनी कविताओं को ‘स्वप्न के आलोक’ में बखूबी प्रस्तुत किया है।

इस अवसर पर लेखिका मनोरमा शर्मा मनोरम ने अपनी सृजन प्रकिया को बहुत ही संवेदनशील तरीके से सबको बताते हुए कहा कि अपने जीवन में अचानक आई रिक्तता से निराश होकर कविता की उंगली थामी और मुझे महसूस हुआ कि साहित्य का हाथ थाम कर मेरे मन को शांति, सुकून और चैन की प्राप्ति होती है और मेरी लेखनी चल पड़ी और उन्होंने बताया कि साहित्य की धरोहर कवि चंद्रकुमार ‘सुकुमार’ ने उनकी पहली किताब को छपवाने के लिए प्रेरित किया।

सुरेश ज्ञानविहार यूनिवर्सिटी के कालिंदी सभागार में स्पंदन महिला साहित्य एवं शैक्षणिक संस्थान के तत्वाधान में आज राज्य की वरिष्ठ कवयित्री मनोरमा शर्मा के काव्य’स्वप्न के आलोक’ का विमोचन मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय कवि,साहित्यकार,
अनुवादक दामोदर खड़से,अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र शर्मा कुसुम,कवयित्री मनोरमा शर्मा ‘मनोरम’ विशिष्ट अतिथि प्रबोध कुमार गोविल,
विशिष्ट अतिथि जगदीश रावत, समीक्षक सुशीला शील और कवयित्री रेनू शब्दमुखर ने भव्य समारोह में किया।

‘स्वप्न के आलोक’ से कुछ चुनिंदा कविताओं को ज्योत्स्ना सक्सेना,
डॉ कंचना सक्सेना,रेनू शब्दमुखर ने वाचन किया। समीक्षक सुशीला शील ने उनकी कृति ‘स्वप्न के आलोक’ की समीक्षा करते हुए कहा कि उनकी कविताएं जीवन की कविताएं हैं। उनकी कविताओं के माध्यम से उन्होंने सार्थक और सटीक समीक्षाएं प्रस्तुत की।
अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र शर्मा कुसुम ने अपने वक्तव्य में कहा कि वेदना जब संवेदना बन जाती है तब कविता बन जाती हैं और मनोरमा जी की कविताएं उच्च स्तरीय संवेदनाओं को छूती हुई कविता है।
प्रबोध कुमार गोविल ने मनोरमा जी की कविताओं को मन की छूती हुई बात कहते हुए कहा कि वे मन के उद्गार है जो पाठकों पर कोई ना कोई अपना अक्स बनाएंगे,अपना प्रभावी असर छोड़ेगी।जगदीश रावत ने कवयित्री की कविताओं को विविधता पूर्ण रंगों की कविताएं बताया। कार्यक्रम का सफल खूबसूरत मंच संचालन डॉ.आशा शर्मा ने किया।

कार्यक्रम में कवि किशोर, कवि वरुण चतुर्वेदी,आभा सिंह राज चतुर्वेदी, पूजा उपाध्याय, ज्ञानवती सक्सेना, अरुण ठक्कर, सोहनलाल ‘सोहन’ सीमा वालिया, साबरा हुसैन आदि साहित्य सुधिजनों की गरिमामय उपस्थिति रही।

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