- अगस्त 2016 में शून्य मोबाइल ग्राहक आधार से शुरू होकर, जियो ने राजस्थान में जून 2026 तक 41.4% के सीएजीआर के साथ 2.83 करोड़ मोबाइल ग्राहक जोड़े
जयपुर, अगस्त 28, 2026: रिलायंस जियो ने राजस्थान में अपने कमर्शियल लॉन्च के बाद से पहले ही दशक में टेलीकॉम बाजार में अपनी शीर्ष स्थिति को लगातार मजबूत बनाए रखा है। जब सितंबर 2016 में जियो ने भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था, तब शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि कुछ ही वर्षों में यह पूरे उद्योग की तस्वीर बदल देगा। जियो 5 सितंबर को अपने दस साल पूरे करने जा रहा है।
राजस्थान टेलीकॉम सर्कल में अपने पहले दशक में, नेट मोबाइल सब्सक्राइबर्स जोड़ने के मामले में रिलायंस जियो निर्विवाद रूप से सबसे आगे रहा है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अनुसार, अगस्त 2016 में शून्य ग्राहक आधार से शुरुआत करने वाले जियो ने राजस्थान में पहले ही महीने (सितंबर 2016) में 9.6 लाख मोबाइल ग्राहक जोड़ लिए थे। जून 2026 तक यह आंकड़ा 2.73 करोड़ की नेट ऐडीशन और 41.4% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) के साथ बढ़ते हुए 2.83 करोड़ हो गया है। यह 41.4% सीएजीआर पहले से मौजूद टेलीकॉम ऑपरेटरों से कहीं ज़्यादा है। ट्राई की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक, राजस्थान के 6.85 करोड़ मोबाइल ग्राहक में से 41.2% हिस्सेदारी जियो की है। जियो ने जून 2019 में पहली बार नंबर 1 स्थान हासिल किया था और तब से लगातार अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।
इसके अलावा, राजस्थान के विशाल ग्रामीण और शहरी इलाकों में डिजिटल पहुंच को बढ़ावा देते हुए, जियो ने राज्य में 14.81 लाख घरों तथा परिसरों को जियो फाइबर और जियो एयर फाइबर सेवाओं से जोड़ कर एक नया इतिहास रच दिया है। यह सेवाएं हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और वर्ल्ड-क्लास होम एंटरटेनमेंट प्रदान करती हैं। होम ब्रॉडबैंड सेगमेंट में भी जियो राजस्थान का निर्विवाद मार्केट लीडर बना हुआ है।
जियो की जबरदस्त ग्रोथ के मुख्य कारण
जून 2026 तक पूरे देश में जियो के लगभग 53.33 करोड़ ग्राहक हैं, जिनमें 28.5 करोड़ 5जी ग्राहक शामिल हैं। जियो के लॉन्च से पहले, कॉल रेट और डेटा चार्ज ग्राहकों के लिए बड़ी समस्याएं थीं। जियो ने किफायती डेटा और फ्री कॉलिंग की रणनीति अपनाकर एक नए दौर की शुरुआत की और ग्राहकों को उनकी इन दोनों चिंताओं से मुक्त कर दिया । एक दशक पहले, भारतीय ग्राहक मोबाइल डेटा का इस्तेमाल लगभग मेगाबाइट के हिसाब से नाप-तोलकर किया करते थे। आज देश में डेटा की खपत इतनी ज़्यादा है कि बहुत कम बाज़ार ही होंगे जो इसकी बराबरी कर सकें। इस बदलाव के पीछे जियो की एक बड़ी स्टोरी है, जो की कनेक्टिविटी को सस्ता बनाने से लेकर ऐसी टेक्नोलॉजी, डिवाइसेज़ और मज़बूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने तक का सफ़र है।
2016 में, भारत में प्रति सब्सक्राइबर औसत मासिक मोबाइल डेटा खपत 0.2 जीबी से कम थी। एक गीगाबाइट डेटा की कीमत लगभग 228 रुपये थी। 1 करोड़ से भी कम भारतीयों की पहुंच 4जी नेटवर्क तक थी और औसत डाउनलोड स्पीड मुश्किल से लगभग 2.5 एमबीपीएस के आसपास पहुंचती थी। फिर आया जीयो । इसके बाद जो हुआ, वह सिर्फ़ एक टेलीकॉम प्राइस वॉर नहीं थी बल्कि इसने भारतीयों के इंटरनेट के साथ रिश्ते को ही बदल दिया। आज एक दशक बाद, एक गीगाबाइट की कीमत लगभग 7.9 रुपये है, जो करीब 97 प्रतिशत कम है। देश भर में एक्टिव 4जी और 5जी सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर लगभग 93.8 करोड़ हो गई है। जियो के नेटवर्क पर, एक एवरेज सब्सक्राइबर अब प्रति माह 42.3 जीबी डेटा इस्तेमाल करता है।
टेलीकॉम नेटवर्क की पिछली पीढ़ियां ज़्यादातर इम्पोर्टेड प्रोप्राइटरी हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर पर आधारित थीं, जिसकी वजह से ऑपरेटर्स को न सिर्फ़ इक्विपमेंट के लिए, बल्कि टेक्नोलॉजी अपग्रेड और रोडमैप वगैरह के लिए भी विदेशी वेंडर्स पर निर्भर रहना पड़ता था। वहीं दूसरी ओर, जियो लगातार एक ऐसे एंड-टू-एंड, क्लाउड-नेटिव स्टैंडअलोन 5जी नेटवर्क को विकसित करने में भारी निवेश कर रहा है, जो भारत के टेरेन के हिसाब से सबसे उपयुक्त है।