जिंदल ग्रुप ने लोहे के नाम पर निकाला सोना-चांदी

factoryकांग्रेस सांसद नवीन जिंदल से जुड़ी कंपनी एक विवाद में फंस गई है, कंपनी पर लोहे के नाम पर सोना-चांदी निकालने के आरोप लगे है। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जिंदल सॉ लि. को दो सप्ताह में बताने को कहा है कि क्यों न कंपनी के भीलवाड़ा जिले में हो रहे खनन पर रोक लगा कर सीबीआई जांच के आदेश दिए जाएं? कोर्ट ने यह भी कहा कि क्यों न खनन पट्टे निरस्त कर नए सिरे से अंतरराष्ट्रीय नीलामी के जरिए आवंटन के आदेश दिए जाएं? न्यायाधीश नरेन्द्र कुमार जैन-प्रथम और न्यायाधीश मीना वी. गोंबर ने यह अंतरिम आदेश भीलवाड़ा प्रेस सोसायटी और चार अन्य की जनहित याचिका पर दिए।

एडवोकेट अभिनव शर्मा ने बताया कि सरकार ने जिंदल सॉ लि. को भीलवाड़ा जिले के पुर-बानेड़, ढूलखेडा, डेड़वास तथा लांपिया गांव में करीब 20 वर्ग किलोमीटर में लोहा और अन्य खनिज के लिए खनन पट्टे जारी किए है। यह इलाका अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने यहां खनन पर रोक लगा रखी है। खनन अभियंता ने पहले जिंदल कंपनी के आवेदन पर यही आपत्ति दर्ज की और बाद में अनापत्ति दे दी।

केंद्र सरकार ने 1999 के आस-पास भारतीय भू-सर्वेक्षण विभाग पश्चिमी क्षेत्र के तत्कालीन महानिदेशक आर.एस गोयल को क्षेत्र में उपलब्ध खनिजों का पता लगाने को कहा था लेकिन वह सर्वेक्षण रिपोर्ट आज तक न तो राज्य सरकार के पास है, न ही केन्द्र सरकार के पास। अलबत्ता गोयल ने सेवानिवृत्ति के फौरन बाद जिंदल सॉ लि. के खान विभाग के चेयरमैन के रूप में काम शुरू कर दिया।

सर्वे में इलाके में सोना-चांदी होने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद ही जिंदल ने खनन पट्टों के लिए आवेदन किया था। कंपनी तीन साल से सैंपलिंग करने के नाम पर करोड़ों टन खनिज बिना कोई टैक्स या रॉयल्टी के गुजरात ले जा रही है।

आरटीआई में सूचना मांगने के बाद कंपनी ने बिक्री कर देना शुरू किया, जबकि पहले सैंपलिंग के नाम पर नहीं दिया जा रहा था। याचिका में कहा है कि जिंदल सॉ लि. अब तक सैंपलिंग करवाने के नाम पर करीब 22 हजार 600 टन से ज्यादा खनिज ले जाकर करीब तीन लाख 40 हजार करोड़ का चूना सरकार को लगा चुकी है। यदि खनन पट्टे अंतरराष्ट्रीय निविदा के जरिए होते तो सरकार को करोड़ों रुपयों की आय होती। कंपनी ने भीलवाड़ा शहर में एसटीपी प्लांट के लिए 19 हजार वर्गमीटर से ज्यादा जमीन ली है, लेकिन लगाया नहीं है।

राज्य और केन्द्र सरकार ने जिंदल कंपनी को खनन पट्टे देने के लिए राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा-16 सहित अन्य सभी कानून और नियमों को ताक पर रख दिया। खनन के लिए दी गई 20 किमी. दायरे में मेजा बांध की नहरें, तालाब, कुएं, पीडब्ल्यूडी की गैर-मुमकिन सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग 79 का बड़ा हिस्सा, मंदिर, मस्जिद, कब्रिस्तान, सरकारी स्कूल तक आवंटित कर दिए। कंपनी यहां से लोहे के नाम पर सोना, चांदी, लेड, जिंक, कॉपर, कोबाल्ट निकाल रही है। कंपनी ने 126 पार्क गोद लेकर विकास भी नहीं किया है। कंपनी को भीलवाड़ा में एक रेल ओवर ब्रिज का पूरा खर्चा उठाना था लेकिन अब तक कुछ नहीं किया है।

याचिका में सीबीआई या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच करवाने, कंपनी के खनन पट्टे निरस्त करने, किसानों की जमीन अवाप्ति की कार्रवाई रोकने, खनन इलाके को फौरन कब्जे में लेकर अंतरराष्ट्रीय निविदा के जरिए आवंटित करने के आदेश देने की गुहार की गई है।

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